सीतापुर में नजूल की जमीन पर कब्जा मामला, हाई कोर्ट ने कांग्रेस की अंतरिम राहत अर्जी की खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सीतापुर में नजूल जमीन पर कांग्रेस कार्यालय के मामले में पार्टी को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ।
HighLights
हाई कोर्ट ने कांग्रेस की अंतरिम राहत अर्जी खारिज की।
नजूल जमीन पर लंबे कब्जे से अधिकार नहीं बनता।
वैध आवंटन दस्तावेज पेश करने में कांग्रेस विफल रही।
विधि संवाददाता, लखनऊ। सीतापुर में नजूल जमीन पर कांग्रेस कार्यालय के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कांग्रेस को फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल लंबे समय से जमीन पर कब्जा होने से सरकारी भूमि पर अधिकार नहीं बन जाता।
याचिकाकर्ताओं को यह साबित करना होगा कि जमीन का विधिवत आवंटन उनके पक्ष में हुआ था, लेकिन इसके समर्थन में कोई आवंटन आदेश या अन्य वैध दस्तावेज पेश नहीं किया गया। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कांग्रेस कमेटी सीतापुर की याचिका पर यह आदेश दिया।
याचिका में सीतापुर नगर पालिका परिषद के कार्यपालक अधिकारी (प्रभारी) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मोहल्ला टामसेनगंज स्थित प्लाट संख्या 244/1 के अभिलेखों से याचिकाकर्ताओं के नाम हटाने और कब्जा खाली कराने का निर्देश दिया गया था।
कांग्रेस की ओर से कहा गया कि घंटाघर के ऊपरी हिस्से में स्थित परिसर संख्या 1/6 पर वर्ष 1971 से उसका कब्जा है। इसके समर्थन में वर्ष 1971 में 320 रुपये किराया जमा करने की रसीद भी पेश की गई। हालांकि, कोर्ट के सामने आया कि इसके बाद करीब 55 वर्षों से कोई किराया जमा नहीं किया गया।
साथ ही जमीन के वैध आवंटन, पट्टे या कब्जे के अधिकार से संबंधित कोई समझौता या आवंटन पत्र भी पेश नहीं किया गया। राज्य सरकार ने कहा कि नजूल भूमि सरकारी संपत्ति है और किसी राजनीतिक दल को उस पर कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने इस दलील को भी महत्वपूर्ण माना कि सरकारी जमीन पर कब्जा लंबे समय तक रहने मात्र से वैध नहीं हो जाता। वैध कब्जे के लिए आवंटन आदेश या अधिकार स्थापित करने वाला अन्य दस्तावेज जरूरी है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद कांग्रेस को दो सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करना होगा। मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।
