हाईकोर्ट से झटका फिर भी कब्जा, राजा गार्डन में डूसिब की जमीन पर पुराने लाइसेंसी का ढांचा बरकरार
दिल्ली के राजा गार्डन में डूसिब की बेशकीमती जमीन पर पुराने लाइसेंसी के ढांचे निर्धारित समय सीमा के बाद भी ...और पढ़ें
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HighLights
राजा गार्डन में डूसिब की बेशकीमती जमीन पर पुराने ढांचे बरकरार।
अदालत के आदेश के बावजूद नहीं हटाए गए मैरिज होम के ढांचे।
साइट खाली कराए बिना ही डूसिब की नई टेंडर प्रक्रिया पर सवाल।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख इलाके राजा गार्डन में दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) की बेशकीमती जमीन से जुड़ा मामला सवालों के घेरे में आ गया है। दो-दो एकड़ क्षेत्रफल वाले पांच भूखंडों पर पुराने लाइसेंसी द्वारा बनाए गए मैरिज होम के ढांचे निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी नहीं हटाए गए हैं। वहीं साइट खाली कराए बिना ही डूसिब नई टेंडर प्रक्रिया की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में पूरे मामले में डूसिब की कार्रवाई और निष्पक्ष टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, डूसिब के पास राजा गार्डन में करीब दो-दो एकड़ के पांच भूखंड हैं। इन भूखंडों को दो वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस शुल्क के आधार पर दिया जाता है। इनमें जिस कंपनी को लाइसेंस दिया गया था, उसका समय जून में समाप्त हो चुका है।
हाई कोर्ट से नहीं मिली थी राहत
लाइसेंस अवधि समाप्त होने के बाद कंपनी ने साइट पर बने अपने ढांचों को हटाने के बजाय दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। कंपनी ने कथित तौर पर नई निविदा जारी होने तक वहां बने रहने की अनुमति मांगी। इस मामले में डूसिब ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि निष्पक्ष तरीके से नई निविदा तभी निकाली जा सकती है, जब पुराने लाइसेंसी द्वारा बनाए गए ढांचे हटा दिए जाएं और साइट पूरी तरह खाली स्थिति में विभाग को उपलब्ध हो।
बताया जा रहा है कि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने कंपनी को राहत देने से इनकार करते हुए ढांचे हटाने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। इसके बाद कंपनी ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उसे राहत नहीं मिली।
अब विवाद इस बात को लेकर खड़ा हो गया है कि अदालत द्वारा दी गई अवधि समाप्त होने के बावजूद संबंधित साइट पर पुराने लाइसेंसी के ढांचे कथित तौर पर अभी तक मौजूद हैं। सवाल उठ रहा है कि जब विभाग ने स्वयं अदालत में निष्पक्ष टेंडर के लिए साइट का खाली होना जरूरी बताया था, तो अदालत के आदेश के बाद उस स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
आरोप है कि निर्धारित समय में ढांचे नहीं हटाए जाने के बावजूद डूसिब ने अब तक प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की है। इसी आधार पर डूसिब के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। उधर डूसिब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अदालत द्वारा ढांचा हटाने के लिए जो समय सीमा दी थी, वह 18 अगस्त को समाप्त हो रही है। इस समय सीमा के बाद डूसिब ढांचा हटाने के लिए प्रक्रिया शुरू करेगा।
