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    'भ्रष्टाचार की वजह से हारी TMC', बंगाल पर पार्टी उपाध्यक्ष के बयान से असहज हुई सपा; पार्टी लाइन से अलग बोले किरणमय नंदा

    Updated: Tue, 05 May 2026 08:48 PM (IST)

    समाजवादी पार्टी में बंगाल चुनाव परिणामों को लेकर आंतरिक मतभेद सामने आए हैं। जहां अखिलेश यादव भाजपा पर 'वोटों की लूट' का आरोप लगा रहे हैं, वहीं पार्टी ...और पढ़ें

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    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की करारी पराजय के बाद विपक्षी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। परिणाम आने के बाद भाजपा के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर समाजवादी पार्टी में भी इसे लेकर थोड़ा असमंजस दिख रहा है।

    सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बंगाल में भाजपा की जीत को वोटों की लूट करार दे रही है, परंतु उनकी ही पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने इसके पीछे टीएमसी सरकार की एंटी इनकंबेंसी और भ्रष्टाचार को बड़ी वजह बताया है। इससे असहज पार्टी नेतृत्व की ओर से हालांकि उनके बयान पर अभी कुछ नहीं कहा गया है।


    बंगाल में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है। सोमवार को परिणाम आने के बाद सपा प्रमुख ने भाजपा की जीत को ‘फरेब फतह’ करार देते हुए कहा था कि बंगाल में वर्ष 2022 के यूपी विधान सभा चुनाव की तरह चुनावी व्यवस्था के नाम पर केंद्रीय बलों का किया गया है। मंगलवार को भी सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा में सब नकली नेताओं का जमघट हैं। लोकतंत्र में उनका तनिक भी विश्वास नहीं है। उसका काम लूट करना है।

    पश्चिम बंगाल में भाजपा ने वोट की शर्मनाक लूट की। पुलिस-प्रशासन का अवैध इस्तेमाल करने में उसे कतई संकोच नहीं। इससे पहले चुनाव के दौरान भी सपा प्रमुख ने टीएमसी को समर्थन दिया था, हालांकि वह प्रचार के लिए बंगाल नहीं गए थे। एक तरफ तो सपा प्रमुख बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिलने के लिए बंगाल जाने वाले हैं।

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    वहीं दूसरी तरफ किरणमय नंदा का रुख पार्टी लाइन से अलग नजर आ रहा है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार और अत्याचार के आरोप हैं। लोग विकास और भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार चाहते हैं। टीएमसी इन्हीं आरोपों के कारण हारी है।

    लोगों ने पहले ही उसे हराने का फैसला ले लिया था। यह भी कहा है कि उन्होंने पहले ही अखिलेश यादव को सूचित कर दिया था कि टीएमसी ये चुनाव हार जाएगी। उनका कहना है कि जिस तरह बंगाल में एंटी इनकंबेंसी थी, उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी भाजपा सरकार के विरुद्ध स्थिति है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सपा प्रमुख के अलग-अलग रुख सामने आने के बाद सपा के अंदर रणनीति और मुद्दों पर पूरी तरह सहमति न होने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

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