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    वट सावित्री व्रत पर भरणी नक्षत्र का विशेष संयोग, अधिक बढ़ा ग्रहों की शुभ युति से व्रत का महत्व

    By Digital Desk Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Thu, 14 May 2026 03:40 PM (GMT+05:30)

    Vat Savitri Vrat 2026: उदया तिथि के अनुसार 16 मई को वट वृक्ष पूजन श्रेष्ठ रहेगा। ...और पढ़ें

    वट वृक्ष के नीचे माता सावित्री एवं सत्यवान का पूजन कर कच्चे धागे से परिक्रमा

    वट वृक्ष के नीचे माता सावित्री एवं सत्यवान का पूजन कर कच्चे धागे से परिक्रमा 

    HighLights

    1. शनि जयंती और शनि अमावस्या के भी दुर्लभ संयोग से फलदायी होगा व्रत

    2. मिथुन राशि में गुरु और शुक्र की युति अत्यंत शुभ फलदायी

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर वट सावित्री व्रत इस वर्ष 16 मई शनिवार को विशेष शुभ संयोग में मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं इस व्रत को रखती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार अमावस्या पर भरणी नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के साथ ग्रहों की शुभ युति व्रत के महत्व को और बढ़ा रही है।

    ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होकर 17 मई को देर रात 1:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 16 मई को वट वृक्ष पूजन श्रेष्ठ रहेगा। उन्होंने बताया कि सुबह चंद्रमा मेष राशि में मंगल के साथ युति बनाएंगे और रात्रि 10:46 बजे वृषभ राशि में प्रवेश कर सूर्य के साथ युति करेंगे। वहीं मिथुन राशि में गुरु और शुक्र की युति अत्यंत शुभ फलदायी मानी जा रही है।

    आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि इसी दिन शनि जयंती और शनि अमावस्या का भी संयोग बन रहा है, जिससे यह व्रत और अधिक फलदाई होगा। भरणी नक्षत्र में किया गया वट सावित्री व्रत अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और परिवार की समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।
    महिलाएं इस दिन स्नान कर नए वस्त्र एवं सोलह श्रृंगार धारण करती हैं। वट वृक्ष के नीचे माता सावित्री एवं सत्यवान का पूजन कर कच्चे धागे से परिक्रमा की जाती है। पूजा में दूध, हल्दी, कुमकुम, नारियल, भीगे चने, फल और पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

    इस कारण खास है व्रत

    आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि व्रत की पौराणिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। तभी से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना से वट सावित्री व्रत रखती हैं। शास्त्रों में वट वृक्ष को देववृक्ष कहा गया है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना गया है। कच्चे धागे से बरगद के पेड़ की परिक्रमा कर महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करतीं हैं।

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