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    अन्नापूर्णा भवन का काम अटका, गौतमबुद्धनगर और गोरखपुर समेत इन शहरों में सड़क किनारे नहीं मिल सकी सरकारी जमीन

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:01 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश में अन्नपूर्णा भवन परियोजना उपयुक्त सरकारी भूमि की कमी के कारण अटकी हुई है, खासकर गौतमबुद्धनगर जैसे शहरी जिलों में। खाद्य एवं रसद मंत्री ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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    HighLights

    1. अन्नपूर्णा भवन परियोजना उपयुक्त सरकारी जमीन न मिलने से अटकी।

    2. गौतमबुद्धनगर सहित 15 जिलों में जमीन की उपलब्धता नहीं।

    3. मंत्री ने मुख्य सचिव से समाधान निकालने का आग्रह किया।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। सरकारी गल्ला वितरण और एकीकृत सेवा केंद्र एक छत के नीचे स्थापित करने की मंशा से बनने वाले अन्नपूर्णा भवनों पर जमीन कमी का ग्रहण लग गया है। राज्य के अधिकतर जिलों में आबादी से चार सौ मीटर की दूरी और संपर्क मार्गों से लगी सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हैं।

    शहरी क्षेत्रों में यह संकट ज्यादा है, जिससे राशन की दुकानों के आधुनिकीकरण के लिए परिकल्पित भवन की प्रगति धीमी हो गयी है। खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने मुख्य सचिव से गरीब सुविधा की इस बड़ी योजना सामने खड़े संकट से निकलने का उपाय तलाशने को कहा है।

    प्रदेश सरकार ने सरकारी राशन वितरण के लिए अन्नपूर्णा भवन बनाने का निर्णय था। शुरू में जिस भवन में उपभोक्ताओं के लिए पेयजल, शौचालय की सुविधा और नागरिक सुविधा केंद्र खोला जाना था, जहां जन्म, मृत्यु प्रमाण, आधार में संशोधन और क्षेत्रीय लोगों के सत्यापन की सुविधा दी जानी थी।

    500 करोड़ हुए जारी

    बाद में इस भवन में दैनिक उपयोगी वस्तुओं की दुकानें खोलने की योजना जोड़ी गयी। प्रत्येक जिले में 225 अन्नपूर्णा भवन बनने हैं। इसके लिए वर्ष 2025-26 में सरकार ने 200 करोड़ रुपये आवंटित हुए, जिससे 1,645 भवन का कार्य शुरू हुआ। वर्ष 2026-27 में 500 करोड़ रुपये और जारी हो गये।

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    सात जुलाई को लखनऊ में हुई रसद स्थायी समिति की बैठक में सदस्य विधायकों ने अन्नपूर्णा भवनों के आबादी से दूर होने, संपर्क न होने, कई स्थानों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने का सवाल उठाया। कहा गया कि भवन आबादी से 400 मीटर के दूरी पर बनने थे, जिसका उद्देश्य राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है।

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    भवन ऐसे स्थान पर बनेने चाहिए जहां, दिव्यांग, वृद्ध, रोगी आसानी से पहुंच सकें। लोडिंग-अनलोडिंग में अतिरिक्त खर्च न लगे। इस सुझाव को मानते हुए सरकार ने डीएम से वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित भवनों के लिए संपर्क मार्गों के करीब जमीन मांगी। मगर, गौतमबुद्धनगर, गोरखपुर, झांसी, आगरा समेत 15 जिलों में आबादी के करीब और संपर्क मार्गों से जुड़ी सरकारी जमीन उपलब्धता नहीं है।

    जिन 65 जिलों ने प्रस्ताव भेजा है, वह भी लक्ष्य पूरा नहीं करता। लखनऊ ने सिर्फ 53, कानपुर शहर ने 75 स्थान उपलब्ध कराया है। प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद का कहना है जहां जमीन उपलब्ध है, वहां कार्य शुरू करा दिया जाएगा।जहां नहीं है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।

    अन्नपूर्णा भवन: मुख्य तथ्य एवं प्रगति विवरण
    योजना के प्रमुख तथ्य
    प्रदेश में बनने वाले कुल अन्नपूर्णा भवन 16,875 भवन
    प्रत्येक जिले में निर्माण का लक्ष्य 225 भवन
    प्रति भवन अनुमानित खर्च ₹ 8.46 लाख
    न्यूनतम आवश्यक सरकारी भूमि 500 स्क्वायर फीट
    बजट आवंटन
    वर्ष 2025-26 हेतु आवंटित बजट ₹ 200 करोड़
    वर्ष 2026-27 हेतु आवंटित बजट ₹ 500 करोड़
    वर्ष 2025-26 के बजट से कार्य प्रगति
    पूर्ण (बनकर तैयार) भवन 844 भवन
    नींव स्तर तक का कार्य (सिर्फ नींव भरी गई) 106 भवन
    लेंटर स्तर पर निर्माणाधीन भवन 240 भवन

     

    विभाग ने जिलाधिकारियों से अन्नपूर्णा भवनों के लिए उन स्थानों पर भूमि मांगी गयी है, जहां खाद्यान्न वाहन आसानी से पहुंच सकें। 2025-26 में मिले धन से कार्य चल रहा है। 2026-27 में मिले धन से अन्नापूर्णा भवन के लिए अभी 65 जिलों से प्रस्ताव मिले हैं। दस जिलों में जमीन को लेकर दिक्कत है। जो प्रस्ताव आये हैं, वहां भी लक्ष्य से कम स्थानों का प्रस्ताव मिला है। मुख्य सचिव को सभी जिलों में कनेक्टीविटी वाले स्थानों पर भूमि उपलब्ध कराने के लिए कहा है। जहां जमीन उपलब्ध हैं, वहां शीघ्र निर्माण शीघ्र शुरू होगा। 2025-26 में आवंटित धन से बन रहे भवनों का कार्य तीन माह के अंदर पूरा करा लिया जाएगा -मनोज पांडेय, खाद्य एवं रसद मंत्री