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    उच्च सदन में पेपर लीक पर सपा का जोरदार हंगामा, सरकार से जवाबदेही की मांग

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 02:51 AM (IST)

    विधानमंडल के उच्च सदन में सपा ने पेपर लीक के मुद्दे पर हंगामा किया, सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप लगाया और वार्षिक कैलेंडर की मांग की। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सपा ने पेपर लीक पर उच्च सदन में किया हंगामा।

    2. स्कूली वाहनों की आयु सीमा पर भी हुई चर्चा।

    3. सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जों का मुद्दा उठा।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधानमंडल के उच्च सदन में बुधवार को पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सपा के सदस्यों ने हंगामा किया। सपा के मुकुल यादव ने इस संदर्भ में सदन में चर्चा की मांग की।

    नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने चर्चा के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं के 20 पेपर लीक हुए हैं। पेपर लीक होने से नौकरी की तैयारी में जुटे युवाओं के सपने टूट रहे हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार युवाओं से उनकी नौकरी का अधिकार छीन रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर जारी करना चाहिए। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने सपा के सदस्यों के आरोपों को नकारा और कहा कि राज्य में पेपर लीक होने की परंपरा सपा सरकार के कार्यकाल में पड़ी थी।

    सपा के डा. मान सिंह यादव ने कहा कि जब पेपर लीक होता है तो सरकार पहले मामले को दबाती है, जब मामला नहीं दब पाता है तो कार्रवाई की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सिस्टम को ही लीक कर दिया है। अब राज्य सरकार ने पेपर लीक होने से बचाने के लिए 66 करोड़ रुपये के बजट का प्रविधान अनुपूरक बजट में किया है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि यह राशि संभवत: सरकार पेपर लीक कराने वाले माफियाओं को देगी कि पेपर लीक बंद होने होने से उनकी कमाई न प्रभावित हो। उन्होंने पेपर लीक की वजह से उन अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने के लिए आयु सीमा में छूट देने की मांग कि जिनकी आयु पेपर लीक होने की वजह से दोबारा परीक्षा देने को लेकर अयोग्य हो गई हो।

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    सपा के सदस्यों के आरोपों को लेकर श्रम मंत्री ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2014 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा सहित लगभग परीक्षाओं के पेपर लीक होते थे। इसके बाद सपा के सदस्य सदन से बाहर चले गए।

    सपा के आशुतोष सिन्हा ने स्कूली वाहनों की फिटनेस का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या स्कूली वाहनों की आयु 15 वर्ष से अधिक बढ़ाई जानी चाहिए। भाजपा के देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि निजी कंपनियों को वाहनों की फिटनेस जांच का काम सौंपे जाने से भ्रष्टाचार बढ़ा है।

    परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के अनुसार काम किया जा रहा है। फिलहाल सभी जिलों में वाहनों की फिटनेस की जांच के लिए तीन से चार निजी केंद्रों को खोलने की अनुमति दी जा रही है। अभी 50 जिलों में यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।

    उन्होंने बताया कि अगर शिक्षण संस्थान का वाहन है तो उसके पंजीकरण की तिथि से 15 वर्ष के लिए वह वैध होगा। इसी प्रकार शिक्षण संस्थाओं के साथ संबद्ध ठेके वाली बसों व वैन की आयु सीमा 10 वर्ष निर्धारित की गई है।

    विजय बहादुर पाठक ने नियम 110 के तहत सार्वजनिक संपत्तियों से अवैध कब्जों को हटाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1987 से 2000 के बीच नियमों की अनदेखी कर अमरोहा में चारागाह, नदी व अन्य सार्वजनिक उपयोग की 2880 बीघा सरकारी भूमि की श्रेणी परिवर्तित कर पट्टे आवंटित किए गए।

    इसी प्रकार आजमगढ़ के ग्राम बड़सरा खालसा में ग्राम पंचायत की 150 बीघे भूमिपर अतिक्रमण हुआ है। उन्होंने मांग की सरकार द्वारा इस प्रकार की भूमि के आवंटन की जांच कराई जाए।