यूपी से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को मिल सकती है स्वीकृति, योगी कैबिनेट में होगा फैसला
योगी सरकार गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव को कैबिनेट बैठक में मंजूरी दे सकती है, जिसकी अनुमानित लागत 10,761 करोड़ रुपये है।

हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को मिल सकती है स्वीकृति।
HighLights
गंगा एक्सप्रेसवे हरिद्वार तक विस्तार को मिलेगी मंजूरी।
10,761 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनेगा।
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे, इलेक्ट्रिक बसें भी स्वीकृत होंगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के करीब चार माह बाद गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तार देने की दिशा में योगी सरकार ने कदम बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री ने इस वर्ष 29 अप्रैल को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान इसकी घोषणा की थी।
मेरठ से प्रयागराज तक 593.947 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के लिए करीब 147 किमी लंबे छह लेन (भविष्य में आठ लेन तक विस्तारणीय) ग्रीनफील्ड, प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे के प्रारंभिक अलाइनमेंट को स्वीकृति देने के प्रस्ताव को मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति मिल सकती है।
प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत 10,761 करोड़ रुपये है। वहीं, 7768 करोड़ रुपये से 106 किलोमीटर लंबा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार की शाम चार बजे लोक भवन में कैबिनेट की बैठक में करीब दो दर्जन प्रस्ताव आने की उम्मीद है। औद्योगिक ढांचे के विस्तार, एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है।
गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तारित करने के प्रस्ताव में अमरोहा के ग्राम रिखालू से शुरू होकर बिजनौर होते हुए उत्तराखंड में हरिद्वार के ग्राम नूरपुर पंजनहेड़ी के पास निर्माणाधीन हरिद्वार बाईपास तक जाएगा।
करीब 117 किमी हिस्सा उत्तर प्रदेश और करीब 30 किमी उत्तराखंड की सीमा में होगा। इससे अमरोहा, बिजनौर और हरिद्वार जिले सीधे एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेंगे।
सुलतानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारे 272 करोड़ रुपये से इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लाजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
उप्र राज्य सड़क परिवहन निगम के बस बेड़े को मजबूत करने के लिए नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल सकती है। इसके अलावा गृह विभाग में निष्प्रयोज्य वाहनों के स्थान पर 1057 और 266 नए वाहन खरीदने के दो अलग-अलग प्रस्ताव भी शामिल हैं।
बैठक में जन सेवा केंद्र (सीएससी) 4.0, सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र विकास योजना, अस्पतालों के विकास में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की नीति और मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना से जुड़े प्रस्ताव भी रखे जाने की उम्मीद है।
मैनपुरी में समान पक्षी विहार के निकट पर्यटन विकास के लिए छह हेक्टेयर ग्रामसभा भूमि पर्यटन विभाग को निशुल्क हस्तांतरित करने का प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल सकती है।
छात्रवृत्ति से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक के प्रस्ताव
समाज कल्याण विभाग का वंचित रह गए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान करने के लिए पोर्टल दोबारा खोले जाने का प्रस्ताव आ सकता है। कुल 3.16 लाख विद्यार्थी तकनीकी कारणों से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रह गए हैं।
वहीं, वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण से जुड़े नियमों में नए प्रविधान जोड़े जाने पर भी निर्णय हो सकता है। इसमें बुजुर्गों का ध्यान न रखने पर बच्चों या रिश्तेदारों को उस संपत्ति से बेदखल करने के प्रविधान हैं।
पुलिस में मृतक आश्रित भर्ती प्रक्रिया में बदलाव
मृतक आश्रित श्रेणी के तहत दारोगा और सिपाही भर्ती में आश्रित अभ्यर्थियों (पुरुष व महिला) को उम्र के अनुसार श्रेणियों में बांटा जाएगा, ताकि उन्हें उनकी आयु वर्ग के लोगों के साथ निर्धारित दूरी की दौड़ पूरी करने की समय-सीमा मिलेगी।
दरअसल मृतक आश्रित के दावेदारों की उम्र कई बार सामान्य उम्मीदवारों से अधिक होती है। उम्र में अंतर के कारण कई अभ्यर्थियों के लिए मौजूदा समय-सीमा में दौड़ पूरी करना मुश्किल होता था। इसी समस्या को देखते मृतक आश्रित कोटे में भर्ती के लिए आवेदकों को आयु के हिसाब से श्रेणीवार बांटे जाने का प्रस्ताव आ सकता है।
