यूपी के कॉलेज-यूनिवर्सिटी में रोज दिलाई जाएगी नशामुक्ति की शपथ, ऑनलाइन डिलीवरी और कुरियर की भी होगी जांच
उत्तर प्रदेश के सभी राजकीय व निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अब नशामुक्ति के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। इसमें रोज शपथ, छात्रावास व परिसर का न ...और पढ़ें

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HighLights
रोज दिलाई जाएगी नशामुक्ति की शपथ, परिसर होगा नशामुक्त।
छात्रावास, कैंटीन और पूरे परिसर का नियमित निरीक्षण होगा।
ऑनलाइन डिलीवरी और कूरियर से आने वाली सामग्री की जांच।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। अब सभी राजकीय और निजी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के छात्रावास, कैंटीन और पूरे परिसर का नियमित निरीक्षण कराया जाएगा। आनलाइन डिलीवरी और कूरियर से आने वाली सामग्री की प्रवेश द्वार पर ही जांच होगी।
यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि टिफिन या अन्य माध्यमों से कोई नशीला पदार्थ परिसर में न पहुंचे। परिसर के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों की बिक्री पर सख्ती से रोक रहेगी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश के बाद सख्ती की जा रही है।
प्रत्येक कार्यदिवस की शुरुआत दो मिनट की नशामुक्ति शपथ से होगी। हर शिक्षक सप्ताह में एक दिन अपने पीरियड के अंतिम 10 मिनट विद्यार्थियों के साथ नशामुक्ति विषय पर चर्चा करेंगे। यह निर्णय शुक्रवार को विधान भवन परिसर में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। इसमें प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक शामिल हुए।
होंगे नुक्कड़-नाटक
राज्यपाल विश्वविद्यालयों और छात्रावासों में नशे के बढ़ते चलन पर चिंता जता चुकी हैं। उन्होंने परिसरों को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने, बाहरी खान-पान व टिफिन सेवाओं पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए थे। अब उच्च शिक्षा मंत्री ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं को इससे जोड़ने के लिए यह पहल की है। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रन फार नशामुक्ति, मैराथन, पथ संचलन, भाषण, निबंध, चित्रकला, नाटक और नुक्कड़ नाटक जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच और जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्रेरणादायी स्थलों का शैक्षिक भ्रमण भी कराया जाएगा। अधिक से अधिक विद्यार्थियों को माय भारत पोर्टल से जोड़ने का अभियान भी चलेगा। इसकी निगरानी के लिए पूरे प्रदेश को पांच जोन में बांटा गया है। प्रत्येक जोन के लिए उच्च शिक्षा विभाग का एक वरिष्ठ अधिकारी नोडल अधिकारी होगा।
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विश्वविद्यालय स्तर पर वरिष्ठ नोडल अधिकारी, महाविद्यालय स्तर पर प्राचार्य और प्रत्येक संकाय में अलग नोडल अधिकारी अभियान की नियमित समीक्षा करेंगे। यह भी तय किया गया कि नशे की प्रवृत्ति वाले विद्यार्थियों की पहचान कर उनकी काउंसलिंग कराई जाएगी।
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जरूरत पड़ने पर उनके अभिभावकों को बुलाकर भी बातचीत की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को समय रहते इस बुराई से बाहर निकाला जा सके।