भाजपा की राष्ट्रीय टीम में ‘चुनावी यूपी’ की मजबूत चाल, पीडीए फैक्टर की काट की पूरी कसरत
BJP: आठ महामंत्रियों में दो यूपी से बनाए गए, जबकि अन्य सात राज्यों को एक-एक पद मिला है।

नितिन नवीन की टीम में उत्तर प्रदेश को विशेष वरीयता
HighLights
दो-दो महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री व मोर्चा अध्यक्ष बनाए गए, कई नाम सूची से बाहर
स्मृति ईरानी व हरीश द्विवेदी बने महामंत्री, ओबीसी व अल्पसंख्यक भी यूपी के पास
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में उत्तर प्रदेश को विशेष वरीयता दी है। इसमें जातीय समीकरण साधने के साथ ही पीडीए फैक्टर की काट की पूरी कसरत की गई है।
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2027 से पहले बने राष्ट्रीय संगठन में पहली बार यूपी से दो महामंत्री (स्मृति ईरानी व हरीश द्विवेदी) समेत कुल आठ चेहरों को अवसर दिया गया है। जातीय एवं क्षेत्रीय समीकरण साधते हुए पार्टी ने इस बार प्रो. तारिक मंसूर एवं कुंवर बासित अली के रूप में अल्पसंख्यक कार्ड भी खेला है।
यूपी से ओबीसी समाज की दो महिलाओं को टीम में रखकर बड़ा संदेश दिया गया है। वहीं, जातीय समीकरणों की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण ओबीसी मोर्चा की कमान यूपी के राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य को दी गई है। संगठन में सपा के पीडीए फैक्टर की काट की पूरी कसरत की गई है। वहीं, दूसरी ओर लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में खास भूमिका निभा रहे अरुण सिंह को इस बार मौका नहीं दिया गया।
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं, ऐसे में संगठन पर प्रदेश की नजर टिकी थी। असम विधान सभा चुनाव में प्रदेश प्रभारी रूप में बड़ी भूमिका निभाने वाले हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर ब्राह्मण समीकरण साधा गया है। उन्हें पिछले दिनों राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव का प्रभारी भी बनाया गया है।
2024 लोकसभा चुनाव हारकर हाशिए पर चल रहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाकर उनकी राजनीतिक शक्ति को नया धरातल दिया गया है। आठ महामंत्रियों में दो यूपी से बनाए गए, जबकि अन्य सात राज्यों को एक-एक पद मिला है।
धौरहरा की पूर्व सांसद रेखा वर्मा को तीसरी बार संगठन में अवसर देते हुए फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर ओबीसी और महिला दोनों समीकरणों को साधा गया है, वहीं अलीगढ़ के प्रोफेसर तारिक मंसूर को मंत्री से उपाध्यक्ष बनाकर पार्टी ने यह संदेश दिया है कि पार्टी के वैचारिक धरातल पर खड़े अल्पसंख्यकों को भी जिम्मेदारी मिलेगी।
13 उपाध्यक्षों में दो यूपी से हैं, जबकि अन्य 12 राज्यों को सिर्फ एक-एक पद मिला है। 16 राष्ट्रीय मंत्रियों में से सर्वाधिक तीन चेहरे दिल्ली से हैं, जबकि इसके बाद दो चेहरे भोला सिंह (सांसद बुलंदशहर) और संगीता यादव यूपी की हैं। पार्टी ने इन चेहरों के जरिए अनुसूचित एवं यादव फैक्टर को अपने पाले में करने पर फोकस किया है।
राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा की कमान राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य के हाथ में देकर पार्टी ने पीडीए के व्यूह को तोड़ने की पूरी कसरत की है। मौर्य यूपी में प्रदेश महासचिव रहे हैं। वहीं, मेरठ के रहने वाले कुंवर बासित अली यूपी में अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष थे, जिनकी सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर संदेश दिया है कि पार्टी मुस्लिमों में भी पैठ बढ़ाएगी।
पश्चिम क्षेत्र में नवाब सिंह नागर को अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने गुर्जर कार्ड खेला था, ऐसे में राष्ट्रीय टीम में राज्यसभा सदस्य नोएडा के सुरेंद्र नागर को राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली। मेरठ निवासी एवं राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी, गोरखपुर के राधा मोहन को भी टीम में जगह नहीं मिली।
