ऊर्जा निगमों को वित्तीय संकट से उबारने को अभियंता संघ ने बनाया 15 सूत्रीय चार्टर, यूजर्स के हितों को साधने का भी प्रयास
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने उपभोक्ता हित और ऊर्जा निगमों की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए 15 सूत्रीय चार्टर सौंपा है।

HighLights
गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति, नए कनेक्शन, शिकायतों का त्वरित समाधान।
ऊर्जा निगमों की वित्तीय स्थिति सुधारना, तकनीकी हानियां कम करना।
भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति, डिजिटल निगरानी, जीरो एक्सीडेंट नीति।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विभिन्न मुद्दों को लेकर अमुमन पावर कारपोरेशन प्रबंधन से टकराव के रास्ते पर चलने वाले उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने अब उपभोक्ता हित के साथ ही ऊर्जा निगमों की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने की पहल की है।
संघ के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को शक्तिभवन में अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) व पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष गोयल से मुलाकात कर उन्हें उपभोक्ता हित, ऊर्जा निगमों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने एवं प्रोफेशनल कार्य संस्कृति विकसित करने संबंधी 15 बिंदुओं का चार्टर सौंपा।
डा. गोयल ने संघ की पहल को उचित कदम बताते हुए कहा कि सभी का दायित्व है कि बिजली व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अपनी योग्यता और क्षमता का अधिकतम उपयोग उपभोक्ताओं के हित में करे। ऊर्जा निगमों की वित्तीय स्थिति सुधरने का का फायदा अंततः सभी कार्मिकों को भी होगा।
संघ के महासचिव जितेंद्र गुर्जर ने बताया कि सभी उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कराने, पारदर्शी तरीके से निर्धारित समय में नए संयोजन निर्गत कराने, विद्युत व्यवधान से संबंधित शिकायतों का प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण त्वरित समाधान कराने का चार्टर जारी किया है।
इसमें ऊर्जा निगमों में बेहतर मानव संसाधन विकास सुनिश्चित कराना, ऊर्जा निगमों में प्रोफेशनल कार्य संस्कृति विकसित करना, निवेश मित्र एवं झटपट पोर्टल पर आवेदनों का समयबद्ध एवं पारदर्शी निस्तारण, ब्रेकडाउन का आधुनिक तकनीक एवं प्रभावी मानिटरिंग के माध्यम से त्वरित समाधान कराने एवं ट्रांसफार्मर डैमेज रेट को न्यूनतम करना, ऊर्जा निगमों को लाभकारी, टिकाऊ एवं वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है।
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इसके साथ ही तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में कमी, विद्युत चोरी पर प्रभावी अंकुश एवं राजस्व वसूली में वृद्धि व पारदर्शिता, ई-गवर्नेस, डिजिटल निगरानी एवं भ्रष्टाचार मुक्त कार्यसंस्कृति को बढ़ावा, ऊर्जा निगमों में विद्युत सामग्री की गुणवत्ता के संबंध में “जीरों कंप्रोमाइज” की नीति, ‘जीरो इलेक्ट्रिकल एक्सीडेंट’ की दिशा में प्रभावी कार्य, संयंत्रों की संख्या बढ़ाना, समयबद्ध अनुरक्षण एवं उत्पादन लागत में कमी, सुदृढ़ एवं सुरक्षित पारेषण प्रणाली के साथ उच्च क्षमता की लाइनों, आधुनिक ग्रिड उपकेंद्रों एवं नवीन तकनीकों का उपयोग, ट्रांसफार्मरों के नियमित रखरखाव, संतुलित लोड प्रबंधन एवं गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग व अभियंताओं को नवीन तकनीकों, प्रशिक्षण एवं बेहतर संसाधनों से सशक्त बनाकर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
