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बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक नदियों का रौद्र रूप, बाढ़ से 10 हजार परिवारों पर टूटी आफत; चित्रकूट में मंदाकिनी ने मचाई भीषण तबाही

Updated: Tue, 01 Sep 2026 02:00 AM (IST)

उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश और नदियों के उफान से बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक बाढ़ के गंभीर हालात हैं। चित्रकूट ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने भीषण तबाही मचाई।

  2. प्रयागराज-वाराणसी में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ा, संकट।

  3. गाजीपुर में 12 चरवाहे और 2000 भेड़ें बचाई गईं।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। प्रदेश में मानसूनी बारिश, बैराजों और मध्य प्रदेश की नदियों से आ रहे भारी जलप्रवाह ने कई जिलों में बाढ़ के हालात को गंभीर कर दिया। बुंदेलखंड से लेकर पूर्वांचल तक मंदाकिनी, गंगा, यमुना और वरुणा नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं। मंदाकिनी में आई भीषण बाढ़ से चित्रकूट में भारी तबाही हुई है।

प्रयागराज और वाराणसी में गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ने से लाखों की आबादी पर संकट मंडराने लगा है। अवध क्षेत्र में शारदा और घाघरा (सरयू) नदियों के जलस्तर में वृद्धि से स्थिति गंभीर हो गई है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर सोमवार को फिर खतरे का निशान पार कर शाम को नीचे आने लगा। जलस्तर एक सप्ताह में सात बार खतरे का निशान पार कर चुका है।

बाढ़ ने तुलसी जलप्रपात का प्राकृतिक स्वरूप ही बदल दिया। शरभंग, कालीबराह और अमरावती की त्रिवेणी के तेज बहाव ने ऐसी तबाही मचाई कि रेलिंग, सड़क और बैठक स्थल बह गए। कई चट्टानें भी खिसक गई हैं। प्रदेश का पहला स्काई ग्लास ब्रिज सुरक्षित है, लेकिन आसपास का सुरक्षा ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।

गुप्त गोदावरी, सती अनुसुइया और हनुमानधारा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। भीषण बाढ़ से करीब 10,000 परिवारों की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है। रामघाट पर तेज बहाव में तुलसी मंदिर बह गया। संत तुलसीदास की प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि घाट की 400 से अधिक दुकानें जलमग्न हो गईं।

गोबरिया गांव के लगभग 30 परिवार बेघर हो चुके हैं और परसौंजा में 80 से अधिक कच्चे मकान ढह जाने से प्रभावितों के सामने भोजन और आश्रय का गंभीर संकट है। टिकरिया रपटा बह जाने से मानिकपुर-सतना के बीच संपर्क टूट गया है और यात्रियों को 200 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटना पड़ रहा है।

प्रयागराज में गंगा के जलस्तर में 1.16 मीटर और यमुना में 82 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। तटीय मोहल्लों में नावों का संचालन शुरू कर दिया गया है। वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु को पार कर चुकी हैं और सभी घाटों का आपस में संपर्क कट गया है। मणिकर्णिका घाट की छतों और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में अंतिम संस्कार करने की नौबत आ गई है, वहीं वरुणा के उफान से 75 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं।

फर्रुखाबाद में गंगा नदी चेतावनी बिंदु से ऊपर बह रही है, जिससे सैकड़ों एकड़ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं। हमीरपुर और बांदा में यमुना और केन के उफान से कई रपटों पर आवागमन पूरी तरह बंद हो चुका है। सोनभद्र में लगातार बारिश के चलते रिहंद बांध का जलस्तर अपने अधिकतम स्तर पर पहुंच गया है और इसके फाटक कभी भी खोले जा सकते हैं।

लखीमपुर में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण खैरटिया-तिकुनिया क्षेत्र में मोहाना नदी का कटान जारी है। कटान खैरटिया बांध मार्ग तक पहुंचने से लखीमपुर-बहराइच मार्ग पर भी खतरा है। सीतापुर में घाघरा और शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने लगा है। बहराइच में छह गांवों में घाघरा का बाढ़ का पानी घुस गया है।

गाजीपुर में रात भर चला रेस्क्यू अभियान
12 चरवाहे और 2,000 भेड़ें बचाई गईं गाजीपुर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से डूहिया सरैया के पास एक टापू पर 12 चरवाहे अपनी लगभग 2,000 भेड़ों के साथ फंस गए। डायल 112 पर मिली सूचना के बाद पुलिस और पीएसी की टीम ने 'नाइट विजन ड्रोन' की मदद से सटीक लोकेशन का पता लगाया। करीब छह घंटे चले इस कठिन रेस्क्यू आपरेशन में सभी चरवाहों और भेड़ों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

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