यूपी में अब 'कारतूसों' की होगी निगरानी, निशानेबाजों के लिए नई पॉलिसी बनाएगी योगी सरकार
उत्तर प्रदेश सरकार ने निशानेबाजों को आवंटित कारतूसों के दुरुपयोग की खुफिया जांच शुरू की है और नई कठोर नीति तैयार कर रही है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
यूपी सरकार ने निशानेबाजों के कारतूसों के दुरुपयोग की जांच शुरू की।
मध्य प्रदेश में कारतूसों के हिसाब न मिलने पर यह कदम उठाया गया।
नई नीति में कारतूसों की खरीद-खपत का तीन-स्तरीय रिकॉर्ड होगा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मध्य प्रदेश में निशानेबाजों को आवंटित कारतूसों के दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी शूटरों को कारतूसों के आवंटन और उनकी खपत की खुफिया जांच शुरू करा दी है। साथ ही, नए कारतूसों के आवंटन के लिए कठोर नीति तैयार की जा रही है।
अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच मध्य प्रदेश पुलिस ने खेल कोटे के नाम पर शस्त्र लाइसेंस जारी करने और कारतूसों के कथित दुरुपयोग का राजफाश किया था। जांच में तीन लाख से अधिक कारतूसों का हिसाब नहीं मिला। एक निशानेबाज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, जबकि खेल कोटे से आवंटित 30 निशानेबाजों के शस्त्र लाइसेंस निलंबित किए गए।
गत माह मध्य प्रदेश पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रदेश सरकार के साथ साझा की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने निशानेबाजों को एसोसिएशन के माध्यम से आवंटित कारतूस, निजी स्तर पर खरीदे गए कारतूस और उनकी खपत का ब्योरा जुटाना शुरू किया है। आशंका है कि निजी स्तर पर विदेशों से आयात कारतूसों का दुरुपयोग हो सकता है।
कारतूसों की संख्या और उनकी खपत पर बढ़ी निगरानी
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तावित नई नीति में कारतूसों का रिकार्ड तीन स्तर पर रखे जाने का नियम है। इसके तहत निशानेबाज, शूटिंग क्लब और राइफल एसोसिएशन को कारतूसों की खरीद, इस्तेमाल, खाली खोखों और बची हुई मात्रा का पूरा रिकार्ड रखना होगा। विदेश से आने वाले कारतूसों की संख्या और उनकी खपत पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
राइफल संघ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सांसद श्याम सिंह यादव के अनुसार, राज्य में कारतूस होमगार्ड महानिदेशालय की सुरक्षा में रखे जाते हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही उन्हें निकाला जाता है। निजी स्तर पर निशानेबाज जो कारतूस आयात करते हैं, उनका भी पूरा हिसाब उनके पास रहता है।
सरकार नई नीति बनाएगी तो उसका पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निशानेबाजी में .22 और .12 कैलिबर के कारतूस इस्तेमाल किए जाते हैं। इनके दुरुपयोग की आशंका न के बराबर होती है।
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निशानेबाजी में लगातार दो बार राज्य चैंपियन रहे शूटर रचित टंडन का कहना है कि अब तक शूटरों ने देश को सबसे ज्यादा पदक दिलाए हैं। मुख्यमंत्री ने सरोजनीनगर क्षेत्र में शूटिंग रेंज बनाने का वादा किया था। इस रेंज में यदि सेफ हाउस भी बनाया जाए और शूटरों की राइफल, पिस्टल व कारतूस वहीं रखने की सुरक्षित व्यवस्था हो, तो दुरुपयोग की आशंका ही खत्म हो जाएगी।
प्रमुख स्पर्धाओं और इस्तेमाल होने वाले कारतूस
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-10 मीटर एयर राइफल और एयर पिस्टल: 4.5 मिमी (.177 कैलिबर) एयर पेलेट।
-25 मीटर पिस्टल और 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल: .32 बोर के कारतूस।
-50 मीटर राइफल: रिमफायर लॉन्ग राइफल .22 एलआर कारतूस।
-ट्रैप और स्कीट: .12 बोर के शॉटगन कार्ट्रिज।
-सामान्य तौर पर 10 मीटर एयर स्पर्धाओं में 4.5 मिमी (.177) पेलेट का इस्तेमाल होता है।
