विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महानिदेशक को दिए रोक लगाने के निर्देश

Published: Sat, 07 Nov 2026 12:35 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य को सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया है।

News Article Hero Image

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने निजी प्रैक्टिस पर रोक के लिए कदम उठाने को कहा।

  2. सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर निगरानी सतत प्रक्रिया होनी चाहिए।

  3. बलरामपुर में पुलिस हिरासत में हुई मौत की जांच का आदेश।

विधि संवाददाता, लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने महानिदेशक,चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण को आदेश दिया है कि वह सरकारी डाक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर रोक के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकारी डाक्टर (एलोपैथिक) निजी प्रैक्टिस पर प्रतिबंध नियमावली,1983 के नियम-3 के अनुपालन की निगरानी एक सतत प्रक्रिया की तरह होनी चाहिए। इसके साथ ही न्यायालय ने बलरामपुर जनपद के तुलसीपुर सीएचसी में पुलिस हिरासत में ले जाए गए एक व्यक्ति की मृत्यु के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 21 दिसंबर को होगी।

न्यायमूर्ति राजन राय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने अंकुर मिश्रा की जनहित याचिका पर ये आदेश दिए। याचिका की पोषणीयता पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की ओर से पेश अधिवक्ता ने आपत्ति उठाई, लेकिन न्यायालय ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि एनएचएम को तकनीकी आपत्ति उठाने के बजाय पहले यह देखना चाहिए था कि क्या वास्तव में ऐसी अनियमितता हो रही है और यदि हो रही है तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि वर्ष 2025 में कुछ डाक्टरों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी और कुछ को निलंबित भी किया गया था। न्यायालय ने ऐसी कार्यवाहियों केपरिणाम को भी रिकार्ड पर प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान दाखिल पूरक शपथपत्र में बलरामपुर निवासी रंजीत सैनी की पुलिस हिरासत के दौरान तबीयत बिगड़ने और बाद में मृत्यु होने का मामला भी उठाया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया कि तबीयत बिगड़ने पर उसे उचित और तत्काल चिकित्सा सुविधा देने के बजाय सीएचएसी के एक कमरे में बंद कर दिया गया। बार-बार मदद की गुहार लगाने के बावजूद उसे चिकित्सा सहायता नहीं मिली और कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई।

यह भी पढ़ें- डिजिटल हुआ प्रशासनिक काम: अब लखनऊ विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं काटेंगे सरकारी कॉलेजों के प्राचार्य

कहा गया कि घटना के संबंध में पुलिसकर्मी रमेश और देवाशीष मिश्रा को निलंबित किया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई या जांच नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने महानिदेशक को जांच कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।