सीएजी रिपोर्ट में यूपी के वित्तीय प्रबंधन में बड़ी खामियां उजागर, बजट नियमों का उल्लंघन
सीएजी रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश की एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) में गंभीर खामियां उजागर की हैं, जिससे वित्तीय लेन-देन में कई गड़बड़ियां सामने आ ...और पढ़ें

नियमों का उल्लंघन कर नई योजनाओं के लिए बजट से दिए गए 5120 करोड़ रुपये
HighLights
IFMS में खामियों से वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ियां।
नई योजनाओं पर ₹5,120.88 करोड़ का अवैध खर्च।
सेवानिवृत्त कर्मी की आईडी से ₹5.18 करोड़ की प्रविष्टियां।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने राज्य में सरकारी विभागों के वित्तीय लेन-देन, बजट और वेतन प्रबंधन में प्रयोग किए जाने वाले एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) की खामियों को उजागर किया है। इन खामियों की वजह से वित्तीय लेन देने में कई गड़बड़ियां पाई गई हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश बजट नियमावली में नई सेवाओं (योजनाओं-परियोजनाओं) में पुनर्विनियोजन (धनराशि एक योजना से दूसरी योजना में देने) की अनुमति नहीं है।
इसके बावजूद विभागों ने वर्ष 2018 से 2024 की अवधि में नई सेवाओं पर खर्च के लिए 5,120.88 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। सीएजी का मानना है कि यह गड़बड़ी पुनर्विनिजोयन को प्रतिबंधित करने के लिए एप्लीकेशन नियंत्रण का न होना है।
एक अन्य मामले में वर्ष 2018-19 से 2023-24 के बीच व्यय से संबंधित शीर्ष (मद) में प्रविधानित धनराशि से 13,938 रुपये अधिक का आवंटन योजनाओं के मद में किया गया। इस मामले में बजट आवंटन और स्वीकृतियां जारी किए जाने में आईएफएमएस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
इसी प्रकार आईएफएमएस मिशन मोड प्रोजेक्ट के लिए परियोजना लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाने से केंद्र सरकार से मिलने वाली 20.06 रुपये के सहायता भी राज्य को नहीं मिल सकी।
सीएजी ने यह भी पाया कि वेतन, मकान किराया भत्ता, बोनस, एनपीए आदि के संबंध में आईएफएमएस प्रणाली में मैपिंग का अभाव है। सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के भुगतान, सामान्य भविष्य निधि से संबंधित नियमों को लागू करने तथा कर्मचारी मास्टर डाटाबेस के आंकड़ों की पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए एप्लीकेशन नियंत्रण का अभाव है। ऋण सेवा व अन्य खर्चों के लिए बजट आवंटन व स्वीकृति को आईएफएमएस पोर्टल से अन्यत्र किए जाने पर भी आपत्ति जताई है।
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सुझाव दिया है कि बजट तैयार करने, मांग, बजट के पुनर्विनियोजन तथा समर्पण के लिए कार्यप्रणाली विकसित किया जाए। बजट नियंत्रण आईएफएमएस के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए।
कर्मचारियों के देय मूल वेतन व भत्तों से संबंधित नियमों की मैपिंग की जानी चाहिए। आईटी प्रणाली में पूंजीगत एवं राजस्व मदों के वर्गीकरण को मैप किया जाना चाहिए।
सेवानिवृत्त कार्मिक की आईडी से 5.18 करोड़ रुपये की प्रविष्टियां बढ़ाईं
गोरखपुर चिड़ियाघर में कार्यरत एक आपरेटर जुलाई 2023 में सेवानिवृत्त हुए। इनकी आईडी से अगस्त 2023 से मार्च 2024 के बीच 5.18 करोड़ रुपये से अधिक की 333 प्रविष्टियां बढ़ाई गईं। इसी प्रकार वर्ष 2022-23 में विधानमंडल द्वारा स्वीकृत लेखानुदान के बजट शीर्ष (मद) में बजट आवंटन किया जाना था।
जब मुख्य बजट स्वीकृत की गई तब लेखानुदान के कुछ बजट शीर्ष के तहत कोई प्रविधान नहीं किया गया, जिसकी वजह से बजट शीर्षों में प्रविधान और आवंटन के बिना ही 219,57 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। यह खर्च अभी तक नियमित नहीं किया जा सका है।