जेलों में 'डंडा घड़ी' पहरा पर रहेगी अधिकारियों की नजर, कैदियों के भागने की घटनाओं के बाद गश्त का होगा औचक निरीक्षण
कन्नौज और अयोध्या जेल से कैदियों के भागने के बाद पहरा व्यवस्था को सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। सीसीटीवी से निगरानी व्यवस्था के बावजूद कैदियों के भा ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। कन्नौज और अयोध्या जेल से कैदियों के भागने के बाद पहरा व्यवस्था को सुधारने की कवायद शुरू हो गई है। सीसीटीवी से निगरानी व्यवस्था के बावजूद कैदियों के भागने की समीक्षा के बाद तय किया गया है कि 'डंडा घड़ी' पहरा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इस प्रक्रिया में 24 घंटे वार्डर बाहरी व भीतरी दीवार की टहलते हुए निगरानी करते हैं। अब इस व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद किया जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारी रात की गश्त पर निगरानी रखेंगे और औचक निरीक्षण भी करेंगे।जेलों से कैदियों के भागने की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। जेल में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए डंडा, घड़ी (समय/शिफ्ट) और सख्त पहरा व्यवस्था होती है।
वार्डर डंडे के साथ 24 घंटे निगरानी करते हैं। कैदियों की गिनती, सेल की तलाशी की जाती है। इसके बावजूद कैदियों के भागने की घटनाएं हो रही है। इसको लेकर कारागार मुख्यालय ने गश्त बढ़ाने और अधिक संवेदनशीलता से करने के निर्देश दिए हैं। खासतौर से रात में पहरा व्यवस्था को लेकर चौकन्ना रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वह भी गश्त का औचक निरीक्षण करें। जिससे किसी तरह ही लापरवाही न होने पाए।
कैदियों की सुबह-शाम गिनती और बैरक में जाते समय उनकी जांच में लापरवाही न बरतने के लिए कहा गया है। अयोध्या जेल से भागे कैदियों ने नुकीले औजार से ही बैरक की दीवार की ईंटों को निकाला था। इसलिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए बैरक की औचक तलाशी को भी बढ़ाने के लिए कहा गया है। सूत्रों के अनुसार जेलों में बीते दिनों हुए निलंबन के बाद रिक्त हुए पदों पर नए अधिकारियों, वार्डर की तैनाती कर दी गई है। सेवानिवृत्ति से रिक्त पदों पर भी तैनाती की जा रही है। जिससे सुरक्षा व्यवस्था में कोई खामी न रह जाए।