यूपी में रजिस्ट्री के नियमों में बढ़ाई गई सख्ती, जमीन हो या मकान… बैनामे से पहले दिखाना होगा पक्का कागज
उत्तर प्रदेश में अब संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी। दान विलेख पर निबंधन शुल्क ...और पढ़ें

HighLights
संपत्ति रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व जांच अनिवार्य की गई।
रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1908 में महत्वपूर्ण संशोधन का प्रस्ताव।
दान विलेख शुल्क अब सर्किल रेट पर आधारित होगा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। स्वामित्व न होने पर फर्जी तरीके से किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकेगी। रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी व सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार जमीन, मकान, फ्लैट आदि संपत्ति की रजिस्ट्री करने से पहले उसके स्वामित्व संबंधी मूल दस्तावेजों की जांच को उप निबंधकों द्वारा अनिवार्य बनाने के लिए 118 वर्ष पुराने रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1908 में संशोधन करने जा रही है।
ली जाएगी भारत सरकार की मंजूरी
इस संबंध में मंगलवार को रजिस्ट्रीकरण (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2026 विधानसभा से पारित होने के बाद अब विधान परिषद में पेश किया जाएगा। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के केंद्रीय कानून होने के कारण संशोधन संबंधी विधेयक की व्यवस्था को लागू करने से पहले उस पर भारत सरकार की भी मंजूरी ली जाएगी।
पारित विधेयक के संबंध में स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि ऐसे कई मामले प्रकाश में आए हैं कि संपत्ति के वास्तविक स्वामी के बजाय अन्य व्यक्तियों द्वारा संपत्ति को बेचने के लिए रजिस्ट्री कर दी जा रही है।
इतना ही नहीं प्रतिबंधित संपत्ति, कुर्क संपत्ति, केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि-संपत्ति आदि के विक्रय विलेख (सेल डीड) की भी रजिस्ट्री करा ली जा रही है। बाद में ऐसे मामलों में वर्षों मुकदमेबाजी चलती रहती है।
जायसवाल ने बताया कि वर्तमान में रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1908 के तहत किसी भी डीड की रजिस्ट्री करने से मना करने के लिए उप निबंधक को कोई अधिकार नहीं है, जिससे कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है।
भविष्य में इस तरह के मामलों पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए अब अधिनियम और नियमावली में संशोधन करने के लिए संबंधित अधिनियम की धारा 22 व 35 के बाद नई धारा 22-क, 22-ख और 35-क को जोड़कर कुछ श्रेणियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने, पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने, अचल संपत्ति के पंजीकरण के लिए प्रस्तुत डीज के साथ स्वामित्व, अधिकार, पहचान, विधिपूर्ण कब्जा या अंतरण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है।
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संशोधन विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राज्यपाल व केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद संबंधित अधिसूचना जारी की जाएगी। अधिसूचना जारी होने पर स्वामित्व संबंधी तय किए जाने वाले दस्तावेज न देने पर उप निबंधक किसी भी सेल डीड की रजिस्ट्री करने से इनकार कर सकेंगे।
मंत्री ने बताया कि राज्य में पहले से ही क्रेता-विक्रेता के आधार व मोबाइल नंबर से ओटीपी के जरिए पहचान की जांच करने की व्यवस्था लागू है। संपत्ति के स्वामित्व दस्तावेज की जांच भी अनिवार्य होने से फर्जी रजिस्ट्री पर अंकुश लगेगा, जिससे अनावश्यक मुकदमेबाजी भी थमेगी।
दान विलेख में सर्किल रेट से ही देना होगा निबंधन शुल्क
भारतीय स्टांप अधिनियम-1899 के अनुसूची 1-ख के अनुच्छेद-33 के तहत दान विलेख (गिफ्ट डीड) की लिखी-पढ़ी पर लगने वाले निबंधन शुल्क को सर्किल रेट के अनुसार वसूलने के लिए भी मंगलवार को विधानसभा से रजिस्ट्रीकरण(उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक को विधानसभा से पारित कराया गया।
मंत्री ने बताया कि अभी दान विलेख पर संपत्ति के मूल्य का एक प्रतिशत निबंधन शुल्क लेने की व्यवस्था लागू है। रक्त संबंधी मामलों में दान विलेख पर सिर्फ पांच हजार रुपये ही स्टांप ड्यूटी देनी होती है।
चूंकि ऐसे मामलों में कई बार संपत्ति का बाजार मूल्य, सर्किल रेट से कम बताया जाता है, जिससे निबंधन शुल्क भी कम ही दिया जाता है। इस संबंध में अधिनियम में भी स्पष्ट प्रविधान नहीं है, जिससे निबंधन शुल्क के निर्धारण को लेकर एकरूपता नहीं थी।
जायसवाल ने बताया कि अब अधिनियम में संशोधन करके ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि दान विलेख के मामले में संपत्ति के सर्किल रेट के अनुसार ही एक प्रतिशत निबंधन शुल्क लिया जाएगा। स्पष्ट प्रविधान होने से अब निबंधन शुल्क में एकरूपता के साथ ही उसकी चोरी की भी आशंका नहीं रहेगी।