योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' से महज 4 महीनों में जुड़े 56 जिले; हर गांव तक पहुंचेगी बस
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत योगी सरकार ने मार्च 2026 में कैबिनेट से मंजूरी के बाद महज चार महीनों में उत्तर प्रदेश के 56 जिलों को ग्रामीण बस ...और पढ़ें
-1784473406763_m.webp)
योगी सरकार की मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना से 56 जिले जुड़े
HighLights
मार्च 2026 में मंजूरी के चार माह में 56 जिले जुड़े।
ग्रामीण क्षेत्रों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सुविधा प्रदान।
स्थानीय युवाओं को ड्राइवर-कंडक्टर के रूप में रोजगार के अवसर।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाएं जितनी तेजी से कागजों पर तैयार हो रही हैं, उतनी ही रफ्तार से जमीन पर भी उतर रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' बनकर सामने आई है। मार्च 2026 में कैबिनेट से मंजूरी मिलने के महज चार महीने के भीतर ही इस योजना ने प्रदेश के 75 में से 56 जिलों को ग्रामीण बस सेवा से जोड़ दिया है। अब प्रदेश के उन दूर-दराज के गांवों को भी मुख्य शहरों से जोड़ने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, जहां पहले परिवहन के साधन न के बराबर थे।
अंतिम छोर तक सुरक्षित और सुलभ सफर
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन ग्रामीण मार्गों और ग्राम पंचायतों को सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में शामिल करना है, जो अब तक उपेक्षित थे। इसके जरिए ग्रामीण जनता को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालयों तक सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा दी जा रही है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के साथ-साथ निजी बस संचालकों का भी सहयोग लिया जा रहा है, ताकि उन रूटों पर भी बसों की कमी न रहे जहां पहले सीमित बसें चलती थीं।
56 जिलों में दौड़ने लगीं मिनी बसें, प्रयागराज सबसे आगे
परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 1,012 आवेदन मिले हैं, जिनमें से 858 को हरी झंडी दे दी गई है। वर्तमान में 56 जिलों के ग्रामीण रूटों पर 215 मिनी बसें सफलतापूर्वक चल रही हैं। जिलावार स्थिति देखें तो सबसे अधिक 43 बसें प्रयागराज में शुरू की गई हैं। इसके अलावा मुजफ्फरनगर में 27, झांसी में 19, मथुरा में 18 और जौनपुर में 7 बसों के साथ-साथ बांदा, एटा, मऊ, जालौन और बलिया जैसे जिलों में भी ग्रामीण मार्गों पर कनेक्टिविटी लगातार मजबूत की जा रही है।
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता
योगी सरकार की यह योजना केवल लोगों को सफर की सहूलियत ही नहीं दे रही, बल्कि ग्रामीण स्तर पर आजीविका का बड़ा माध्यम भी बन रही है। इन मिनी बसों के संचालन में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं। बस के ड्राइवर और कंडक्टर के चयन में क्षेत्रीय आवेदकों को प्राथमिकता मिल रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा मिल रहा है।
खबरें और भी
एनसीआर में केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें
योजना के तहत 15 से 28 सीटों वाली डीजल, सीएनजी और इलेक्ट्रिक मिनी बसों को शामिल किया जा रहा है, जिनकी अधिकतम आयु 8 वर्ष से अधिक नहीं होगी। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश के जिलों में केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन को ही अनुमति दी गई है। इन सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों की अधिकतम आयु सीमा 15 वर्ष तय की गई है।
परमिट से छूट और डीएम स्तर पर मॉनिटरिंग
योजना को बिना किसी प्रशासनिक देरी के लागू करने के लिए सरकार ने बस संचालन के लिए अनिवार्य परमिट की शर्त से छूट दे दी है। पात्र आवेदकों का चयन जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में गठित समिति कर रही है, जिसमें सीडीओ और एआरटीओ शामिल हैं। योजना की नियमित समीक्षा के लिए क्षेत्रीय प्रबंधकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो हर महीने अपनी रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंपेंगे ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।