यूपी के संस्कृत स्कूलों में शुरू हुआ 'डिजिटल गुरुकुल' मॉडल, अब श्लोक के साथ छात्र सीखेंगे साइबर सुरक्षा के गुर
उत्तर प्रदेश के संस्कृत विद्यालय अब 'डिजिटल गुरुकुल' मॉडल अपना रहे हैं, जहाँ श्लोक और शास्त्र के साथ आधुनिक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

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राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। प्रदेश में संस्कृत विद्यालय अब केवल श्लोक और शास्त्र तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ‘डिजिटल गुरुकुल’ मॉडल के जरिये आधुनिक शिक्षा की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
परंपरागत ज्ञान के साथ डिजिटल और साइबर साक्षरता को जोड़ते हुए विद्यालयों में हर सप्ताह एक ‘विशेष दिवस’ आयोजित किया जाएगा, जहां छात्रों की व्यक्तिगत क्षमता का आकलन कर उन्हें नई तकनीकों और रोजगारोन्मुख कौशल से जोड़ा जाएगा।
नई पहल के तहत छात्रों को साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के सुरक्षित उपयोग की व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी। इसके लिए आईटी और साइबर क्षेत्र के विशेषज्ञों को विद्यालयों में आमंत्रित कर व्याख्यान और इंटरैक्टिव सत्र कराए जाएंगे, ताकि बच्चे डिजिटल दुनिया के खतरों और उनके समाधान को आसानी से समझ सकें।
छात्रों को ई-लर्निंग की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए उन्हें खान एकेडमी, द टीचर एप, मनोदर्पण पोर्टल और माय करियर एडवाइजर एप जैसे प्लेटफॉर्म के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे उनकी पढ़ाई न सिर्फ रोचक बनेगी, बल्कि करियर प्लानिंग में भी मदद मिलेगी।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव शिवलाल के मुताबिक, संस्कृत विद्यालयों में अब ज्योतिष, योग विज्ञान और वास्तुशास्त्र जैसे विषयों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए तेजी से आवेदन आ रहे हैं।
इससे पारंपरिक विषयों को व्यावसायिक रूप देकर छात्रों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। विद्यालयों में कुटीर उद्योगों के प्रदर्शन, स्थानीय शिल्प और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
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