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    विस अध्यक्ष महाना ने विपक्ष के आचरण पर जताई पीड़ा, कहा- मैं इस कुर्सी के योग्य हूं या नहीं, आत्मावलोकन करूंगा

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 02:50 AM (IST)

    विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना विपक्ष के आचरण से भावुक हो गए और उन्होंने अपनी पद की योग्यता पर आत्मवलोकन करने की बात कही। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना विपक्ष के आचरण से हुए भावुक।

    2. उन्होंने अपनी पद की योग्यता पर आत्मवलोकन करने की बात कही।

    3. विधायिका की गरिमा बचाने को दलगत राजनीति से ऊपर उठने का आह्वान।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधानमंडल के मानसून सत्र के तीसरे दिन विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना विपक्ष के आचरण और सदन की गरिमा को लेकर भावुक हो गए। मंगलवार को हुए हंगामे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अब आत्मावलोकन करना पड़ेगा कि वह इस पद और इस कुर्सी के योग्य हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में अध्यक्ष के रूप में जो प्रयास किए, वे उचित थे या नहीं, इस पर भी उन्हें विचार करना होगा।

    विधान सभा की कार्यवाही बुधवार को जैसे ही शुरू हुई विधान सभा अध्यक्ष ने मंगलवार की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''मेरी लंबी राजनीतिक पारी अब अंतिम चरण में है। मेरा हमेशा प्रयास रहा कि इस विधायिका ने मुझे जो सम्मान दिया है, उसका कुछ ऋण हम वापस कर सकें, परंतु ऐसा लगता है कि हम अपने प्रयास में विफल हैं। सभी को पार्टी से ऊपर उठकर आत्ममंथन करना होगा कि आने वाली पीढ़ी के लिए कैसी संसदीय परंपरा छोड़ रहे हैं।''

    उन्होंने पुराने घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और सदन में दो विधायकों ने अपनी शर्ट उतार दी थी, तब उन्होंने कहा था कि केवल दो विधायकों ने नहीं, बल्कि सभी 403 विधायकों की गरिमा इससे प्रभावित हुई है। इसी तरह विपक्ष में रहते हुए भी मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खिलाफ स्वामी प्रसाद मौर्य की आपत्तिजनक टिप्पणी का भी विरोध किया था।

    विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि विधायक शपथ लेते समय सदन की गरिमा और नेता सदन के सम्मान का भी दायित्व स्वीकार करते हैं। लोकतंत्र में वाद-विवाद, सहमति और असहमति स्वाभाविक है, लेकिन भाषा और व्यवहार की मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए।

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    विधान सभा अध्यक्ष ने संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि 'कमी संविधान में नहीं, बल्कि उसे लागू करने वाले व्यक्तियों में होती है।'

    उन्होंने बिना नाम लिए जसराना से सपा विधायक की ओर इशारा करते हुए कहा कि जिस सदस्य को वह सदन का 'रोल मॉडल' मानते थे, उनके आचरण ने उन्हें सबसे अधिक निराश किया है। मना करने के बावजूद सदन के बाहर जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं था और इससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।