यूपी को अब केंद्र सरकार से सबसे अधिक मिलने लगी बिजली, उपभोक्ता परिषद ने 'गाडगिल फार्मूले' के तहत उठाया था मुद्दा
उत्तर प्रदेश को अब केंद्र सरकार से सबसे अधिक बिजली मिल रही है, जिसका श्रेय गाडगिल फार्मूले को जाता है। यह आवंटन राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा 2008 में उठाए गए मुद्दे का परिणाम है।

यूपी को अब केंद्र सरकार से सबसे अधिक मिलने लगी बिजली।
HighLights
यूपी को केंद्रीय क्षेत्र से सर्वाधिक बिजली आवंटन।
गाडगिल फार्मूले से बड़ी आबादी को मिला लाभ।
उपभोक्ता परिषद के 2008 के प्रयास हुए सफल।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के राज्य सरकार के प्रयासों के बीच अब केंद्र सरकार भी राज्य को भरपूर सहयोग करने लगी है।10 अगस्त को राज्यसभा में पेश केंद्रीय क्षेत्र से राज्यों को बिजली आवंटन के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है।
बड़ी आबादी होने का पूरा लाभ बिजली आवंटन में अब राज्य को मिलने लगा है। ‘गाडगिल फार्मूले’ के मुताबिक केंद्र से प्रदेश को बिजली दिए जाने का मुद्दा वर्ष 2008 में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उठाया था।
परिषद के पत्र के आधार पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष विजय कुमार ने इस फार्मूले के तहत बिजली दिए जाने का पत्र केंद्र सरकार को लिखा था।
राज्यसभा में पेश किए गए केंद्रीय सेक्टर से राज्यों को विद्युत वितरण के आंकड़े बता रहे हैं कि केंद्रीय विद्युत उत्पादन परियोजनाओं से प्रदेश को अन्य राज्यों से अधिक बिजली आवंटित की गई। केंद्रीय परियोजनाओं से 31 मार्च 2025 तक 9530.4 मेगावाट, 31 मार्च 2026 को 10,881.2 मेगावाट और 30 जून 2026 तक 11,520.5 मेगावाट बिजली मिली।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि गाडगिल फार्मूले के तहत राज्य को बिजली आवंटन के लिए वर्ष 2008 में लड़ी गई लड़ाई का लाभ अब प्रदेश को मिलने लगा है। पिछले चार-पांच वर्षों से प्रदेश को केंद्र से अधिक बिजली मिल रही है।
31 मार्च 2025 से 30 जून 2026 के बीच प्रदेश के केंद्रीय क्षेत्र से मिलने वाली बिजली में 1990.1 मेगावाट की वृद्धि हुई थी। 30 जून 2026 को प्रदेश को महाराष्ट्र की तुलना में 2495.3 मेगावाट अधिक बिजली केंद्र से मिली।
गाडगिल फार्मूले के तहत बड़ी जनसंख्या वाला राज्य होने का लाभ यूपी को मिला है, इस फार्मूले के तहत 60 प्रतिशत भारांक जनसंख्या के लिए निर्धारित है।
प्रति व्यक्ति आय, चल रही सिंचाई व बिजली परियोजनाएं, राज्यों की विशेष समस्याएं तथा कर प्रयास पर 10-10 प्रतिशत भारांक निर्धारित है।राज्यों के पिछले पांच वर्षों की ऊर्जा खपत के आधार पर बिजली आवंटन निर्धारित किया जाता है।
केंद्र से प्रमुख पांच राज्यों को मिली बिजली (मेगावाट में)
| राज्य | 31 मार्च 2025 | 31 मार्च 2026 | 30 जून 2026 |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 9530.4 | 10,881.2 | 11,520.5 |
| महाराष्ट्र | 8955.2 | 9059.8 | 9025.2 |
| बिहार | 7,572.2 | 8557.5 | 8559.0 |
| मध्य प्रदेश | 7244.5 | 7668.2 | 7655.3 |
| गुजरात | 7313.9 | 7048.5 | 6998.9 |
यह भी पढ़ें- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन का एलान, विद्युत क्षेत्र में निजीकरण का विरोध करेंगे देशभर के इंजीनियर

