यूपी में गरीब परिवारों के लिए वरदान बनी 'शादी अनुदान योजना', वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही दिखने लगा बड़ा असर
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की 'शादी अनुदान योजना' ओबीसी के गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में बड़ा आर्थिक संबल बन रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में ...और पढ़ें

यूपी में हजारों गरीब बेटियों को मिला शादी के लिए सहारा
HighLights
वित्तीय वर्ष 2026-27 में 5 हजार से अधिक ओबीसी बेटियों को लाभ।
प्रत्येक पात्र परिवार को ₹20,000 की आर्थिक सहायता सीधे खाते में।
दिव्यांग, विधवा, भूमिहीन परिवारों को योजना में मिलती है प्राथमिकता।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए राहत का सबसे मजबूत आधार बनती जा रही हैं। विशेष रूप से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के गरीब परिवारों के लिए संचालित 'शादी अनुदान योजना' बेटियों के विवाह में एक बड़ा आर्थिक संबल बनकर उभरी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही इस योजना का व्यापक और सकारात्मक असर जमीन पर दिखने लगा है, जिसके तहत अब तक 5 हजार से ज्यादा ओबीसी बेटियों की शादी के लिए अनुदान राशि जारी की जा चुकी है।
इस वर्ष 1 लाख से अधिक परिवारों को लाभ देने की तैयारी
गरीब परिवारों के लिए बेटी का विवाह हमेशा से एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक चुनौती रहा है। ऐसे में योगी सरकार की यह योजना जरूरतमंदों के लिए संकट की साथी बनी है। प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 1 लाख 5 हजार लोगों को इस योजना से लाभान्वित करने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। राहत की बात यह है कि शुरुआती महीनों में ही 5,032 लोगों के खातों में राशि भेजी जा चुकी है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी 1 लाख 16 हजार से अधिक आवेदकों को इस योजना का लाभ देकर सशक्त किया गया था।
सीधे खाते में ट्रांसफर होते हैं 20,000
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र परिवार को बेटी की शादी के लिए ₹20,000 की एकमुश्त आर्थिक सहायता दी जाती है। यह पूरी धनराशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में (DBT के माध्यम से) भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की गुंजाइश खत्म हो गई है और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। योजना का लाभ उन परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय ₹1 लाख तक है। इसके साथ ही, विवाह के समय लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है।
संवेदनशील वर्गों को मिलेगी प्राथमिकता
योगी सरकार ने योजना के क्रियान्वयन में समाज के सबसे संवेदनशील और असहाय वर्गों का विशेष ध्यान रखा है। आवेदन प्रक्रिया में विकलांग (दिव्यांग), विधवा महिलाओं, दैवीय आपदा से प्रभावित और भूमिहीन परिवारों को शीर्ष प्राथमिकता दी जाती है, ताकि समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को सबसे पहले मदद मिल सके।
खबरें और भी
पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए सरकार प्रतिबद्ध
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने योजना की गति और सफलता पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह योजना अन्य पिछड़ा वर्ग के गरीब परिवारों को बड़ी राहत दे रही है। लाभार्थियों को बिना किसी देरी के समय पर सहायता राशि उनके खातों में मिल रही है। प्रमुख सचिव ने साफ किया कि योगी सरकार पिछड़े वर्ग के उत्थान, सामाजिक सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।