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    योगी सरकार के 'ज्ञान भारतम् मिशन' ने पकड़ी रफ्तार, डिजिटल होंगी सदियों पुरानी पांडुलिपियां; काशी, अयोध्या और रामपुर बनेंगे केंद्र

    Updated: Thu, 21 May 2026 04:11 PM (GMT+05:30)

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार 'ज्ञान भारतम् मिशन' के तहत प्राचीन पांडुलिपियों के वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण का अभि ...और पढ़ें

    योगी सरकार का 'ज्ञान भारतम् मिशन' तेज

    योगी सरकार का 'ज्ञान भारतम् मिशन' तेज

    HighLights

    1. प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु 'ज्ञान भारतम् मिशन'

    2. हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, वैज्ञानिक संरक्षण

    3. काशी, अयोध्या, रामपुर में मिला सबसे बड़ा खजाना

    डिजिटल डेस्क, लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठा रही है। राज्य में 'ज्ञान भारतम् मिशन' के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, वैज्ञानिक संरक्षण और उनके डिजिटलीकरण के महाअभियान को तेज कर दिया गया है। योगी सरकार का स्पष्ट विजन है कि देश की इस अनमोल बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों और वैश्विक शोधार्थियों तक पहुँचाया जाए।

    पोर्टल पर अपलोड होंगी दुर्लभ पांडुलिपियां, मठ-मंदिरों से साधा जा रहा संपर्क

    इस महत्वाकांक्षी अभियान को लेकर पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि मिशन के अंतर्गत दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। सरकार की योजना के मुताबिक, सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी व सार्वजनिक पुस्तकालयों के साथ-साथ आम नागरिकों के पास सुरक्षित रखी गईं पांडुलिपियों को स्कैन किया जाएगा। इन सभी को एक विशेष डिजिटल पोर्टल पर अपलोड कराया जा रहा है, ताकि हमारी बौद्धिक धरोहर हमेशा के लिए अमर हो सके।

    सर्वे में मिलीं हजारों पांडुलिपियां; काशी, अयोध्या और रामपुर में मिला सबसे बड़ा खजाना

    प्रदेशभर में चलाए जा रहे इस व्यापक सर्वे के दौरान अब तक हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। इन प्राचीन ग्रंथों में धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, साहित्य, संगीत, इतिहास और भारतीय संस्कृति से जुड़े गहरे रहस्य छिपे हैं। शुरुआती सर्वे के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी), अयोध्या और रामपुर जिलों में सबसे अधिक सदियों पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित सामग्रियां प्राप्त हुई हैं, जो हमारे गौरवशाली अतीत को बयां करती हैं।

    गांव-गांव घूम रहीं विशेष सर्वे टीमें, शोधार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ

    इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, शोध संस्थानों और निजी संग्रहकर्ताओं के सहयोग से विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें न केवल ऐतिहासिक स्थलों बल्कि सुदूर गांवों तक पहुंचकर प्राचीन दस्तावेजों और हस्तलिपि का पता लगा रही हैं। मिशन के तहत इन पांडुलिपियों का सिर्फ सूचीकरण ही नहीं होगा, बल्कि इनका वैज्ञानिक उपचार और डिजिटलीकरण भी किया जाएगा, जिससे देश-विदेश के छात्रों और शोधार्थियों को पढ़ाई व रिसर्च में मदद मिलेगी।

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    दस्तावेजों का संरक्षण नहीं, सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना है यह मिशन

    दरअसल, उत्तर प्रदेश हमेशा से संस्कृत, फारसी, अरबी और हिंदी जैसी भाषाओं के पारंपरिक ज्ञान का मुख्य केंद्र रहा है। काशी, अयोध्या, मथुरा और रामपुर जैसे शहरों में बिखरी इस ज्ञान संपदा को अब 'ज्ञान भारतम् मिशन' के माध्यम से एक सूत्र में पिरोया जा रहा है। यह अभियान महज कागजों को सहेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को पुनः स्थापित करने का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक दूरदर्शी संकल्प है।