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    यूपी में शहरों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में भी तय मानकों के तहत बनेंगे भवन, जिला पंचायतों से रहेगी निगरानी

    By Hemant Kumar Srivastava Edited By: Dharmendra Pandey
    Updated: Thu, 09 Jul 2026 07:37 PM (IST)

    Zila Panchayat: ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय ले आउट में न्यूनतम 15 प्रतिशत खुला स्थान छोड़ना होगा। गैर आवासीय भवनों में भी दस प्रतिशत खुला स्थान छोड़न ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. उत्तर प्रदेश में जिला पंचायतों में जल्द लागू होगी भवन मानचित्र स्वीकृति की नई उपविधि

    2. प्रस्तावित उपविधि को अनुमोदन के लिए मंत्री के पास भेजा गया

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब शहरों की तरह ही गांवों में भी भवनों का मानचित्र यानी नक्शा पास होगा। पंचायती राज विभाग की प्रस्तावित “उत्तर प्रदेश की जिला पंचायतों के लिए माडल भवन निर्माण व विकास उपविधियां-2026” जल्द ही जिला पंचायतों में लागू कर दी जाएंगी।

    इस उपविधि पर हितधारकों (बिल्डर, वास्तुविद व जिला पंचायतों के अपर मुख्य अधिकारियों) से मिले सुझावों व आपत्तियों का निस्तारण करते हुए विभाग ने प्रस्तावित उपविधि को अनुमोदन के लिए विभागीय मंत्री ओम प्रकाश राजभर के पास बढ़ा दिया है। मंत्री का अनुमोदन लेने के साथ ही इसे जिला पंचायतों में लागू कराया जाएगा।

    मंत्री से अनुमोदित उपविधि को सभी जिला पंचायतें पास करते हुए जिले में लागू करेंगी। इस उपविधि के लागू होने पर शहरों की तरह ग्रामीण क्षेत्रों का भी सुनियोजित विकास हो सकेगा।आवासीय भवनों के साथ ही वाणिज्यिक भवनों का नक्शा जिला पंचायतें तय मानकों के मुताबिक ही पास करेंगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय ले आउट में न्यूनतम 15 प्रतिशत खुला स्थान छोड़ना होगा। गैर आवासीय भवनों में भी दस प्रतिशत खुला स्थान छोड़ना अनिवार्य होगा। 250 वर्ग मीटर तक आवासीय और 60 वर्ग मीटर तक व्यावसायिक भवनों के निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने की अनिवार्यता नहीं होगी।

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    इसके लिए महज संबंधित जिला पंचायतों को सूचना देनी होगी।प्लास्टर, फ्लोरिंग, सनशेड, चहारदीवारी जैसे छोटे कामों के लिए भी कोई अनुमति नहीं लेनी होगी। होम स्टे, पेईंग गेस्ट हाउस के लिए भी अलग से कोई अनुमति नहीं लेनी होगी।

    जिला पचायतें पहली बार मानचित्र स्वीकृति के लिए विकास शुल्क व अंबार शुल्क वसूलेंगी। विकास शुल्क के लिए प्रदेश के जिलों को तीन श्रेणी में बांटा गया है। जिसमें 250 से लेकर 750 रुपये तक प्रति वर्ग मीटर तक विकास शुल्क लिया जाना प्रस्तावित किया गया है।

    नेशनल हाईवे, एक्सप्रेसवे व स्टेट हाईवे के दोनों तरफ 500 मीटर तक तथा नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों तथा विकास प्राधिकरणों की सीमा से तीन किलोमीटर के दायरे में 25 प्रतिशत अधिक विकास शुल्क लिया जाना प्रस्तावित है।