नेपाल सरकार की रोक के बाद भी बॉर्डर पर केले की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय, कई गांव बने कॉरिडोर
नेपाल सरकार द्वारा केले के आयात पर प्रतिबंध के बाद भारत-नेपाल सीमा पर केले की तस्करी ने संगठित रूप ले लिया है। नौतनवा और सोनौली के सीमावर्ती गांवों को ...और पढ़ें

सीमा पर केले की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय।

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जागरण संवाददाता, नौतनवा। भारत-नेपाल सीमा पर केले की तस्करी ने एक बार फिर संगठित रूप ले लिया है। नौतनवा और सोनौली से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में इन दिनों बड़े पैमाने पर तस्करी की गतिविधियां तेज हो गई हैं। खासकर नौतनवा क्षेत्र के सुंडी, बैरियहवा, संपतिहा, चंडीथान तथा सोनौली के भगवानपुर और परसामलिक क्षेत्र के शिवतरी व बरगदवा गांव तस्करी के प्रमुख कॉरिडोर बनते जा रहे हैं।
नेपाल सरकार द्वारा करीब सात माह पहले केले के आयात पर रोक लगाए जाने के बाद से इस धंधे में तेजी आई है। भारत में जहां केला लगभग 400 रुपये प्रति कैरेट बिक रहा है, वहीं नेपाल में इसकी कीमत 900 से 1000 रुपये प्रति कैरेट तक पहुंच गई है।
इसी भारी मुनाफे के चलते तस्करों का नेटवर्क सक्रिय हो गया है और वे लगातार नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं।बताया जा रहा है कि तस्कर रात के अंधेरे में छोटे वाहनों, साइकिलों और पैदल ढुलाई के जरिए सीमावर्ती पगडंडियों से माल पार करा रहे हैं।
कई जगहों पर खेतों और नदी किनारे के रास्तों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों की मिलीभगत की भी चर्चा है, जिससे यह धंधा और संगठित होता जा रहा है।
इस तस्करी से न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि सीमा की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में तस्करी की बढ़ती गतिविधियों को लेकर आमजन में भी चिंता देखी जा रही है।
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क्षेत्राधिकारी अनिरुद्ध पटेल ने बताया कि मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है, लेकिन सीमावर्ती थानों को सतर्क रहने और तस्करी रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी तस्करी की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।