महराजगंज में बाढ़ के पानी से ज्यादा मलबे की सता रही चिंता, 13 क्यूबिक मीटर आ रहा सिल्ट
भोटेकोशी नदी में बाढ़ के बाद आए अत्यधिक मलबे के कारण महराजगंज में गंडक नहर प्रणाली का संचालन बंद कर ...और पढ़ें

पानी में तीन क्यूबिक मीटर तक सिल्ट आने पर खोली जाएगी गंडक नहर प्रणाली। जागरण
HighLights
गंडक नहर प्रणाली का संचालन मलबे के कारण बंद।
नेपाल से आने वाले पानी में 13 क्यूबिक मीटर सिल्ट।
नहरें तभी चलेंगी जब सिल्ट 3 क्यूबिक मीटर होगी।
जागरण संवाददाता, महराजगंज। भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद पानी से अधिक चिंता उसमें बहकर आने वाले मलबे के निस्तारण की हो गई है। इस कारण गंडक नहर प्रणाली का संचालन बुधवार की शाम बंद कर दिया गया।
गुरुवार को नेपाल से आने वाले पानी में 13 क्यूबिक मीटर सिल्ट आ रही थी। जब यह तीन क्यूबिक मीटर पर आ जाएगी, तब नहरों का संचालन आरंभ किया जाएगा। विभाग ने आशंका जताई है कि यदि इस स्थिति में नहरें चालू रहीं, तो नेपाल से बहकर आने वाला मलबा भर जाएगा।
वाल्मीकिनगर बैराज पर बिहार सिंचाई विभाग के अधिकारी पानी में आने वाली सिल्ट पर नजर बनाए हुए हैं और लगातार परीक्षण भी हो रहा है। नेपाल की तरफ से सिल्ट की मात्रा कम होने पर नहरों के पुनः संचालन की उम्मीद है। भारत-नेपाल के बीच गंडक सिंचाई और विद्युत परियोजना पर 1959 में हस्ताक्षर किए गए थे।
मुख्य नहर प्रणाली को 1975 में आरंभ किया गया, जिससे महराजगंज, कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया और बिहार के गोपालगंज व सिवान जिले में सिंचाई होती है। महराजगंज जिले में नहर की कुल लंबाई 712 किलोमीटर है, जिससे 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। वाल्मिकि बैराज की निगरानी के लिए अभियंताओं की ड्यूटी लगाई गई है।
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महराजगंज सिंचाई खंड एक के अभियंता बिहार सिंचाई विभाग के अधिकारियों के संपर्क में हैं। अवर अभियंता रिपुंजय ने बताया कि नेपाल से आने वाले पानी में 13 क्यूबिक मीटर तक सिल्ट आ रही है, जो चिंताजनक है। अधिकतम तीन क्यूबिक मीटर तक सिल्ट होने पर ही नहर का संचालन किया जाता है। सिल्ट की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही है।
