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    महराजगंज में चाय बेचने वाले पिता के बेटे ने जीती NEET की जंग, संघर्ष को बनाया सफलता की मिसाल

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 10:28 AM (IST)

    महराजगंज के झनझनपुर निवासी शिवम मद्धेशिया ने नीट परीक्षा में 585 अंक प्राप्त कर सफलता हासिल की, जिससे उनके चाय बेचने वाले पिता का सपना पूरा हुआ। यह कह ...और पढ़ें

    शिवम मद्धेशिया। जागरण

    शिवम मद्धेशिया। जागरण

    HighLights

    1. चाय विक्रेता के बेटे शिवम ने नीट परीक्षा पास की।

    2. 585 अंक प्राप्त कर परिवार का नाम रोशन किया।

    3. पिता के संघर्ष और हौसले ने दिलाई सफलता।

    अजय कुमार शर्मा, हरिहरपुर, (महराजगंज)। किसी की मंजिल उसके पिता का पेशा तय नहीं करता, बल्कि उसकी मेहनत और हौसले तय करते हैं। झनझनपुर चौराहे पर चाय बेचने वाले एक पिता ने अपने बेटे के हाथों में केतली नहीं, किताब थमाई। बेटे ने भी पिता के पसीने की कीमत समझी और नीट की परीक्षा उत्तीर्ण कर यह साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान आर्थिक हालात नहीं, बल्कि इरादों की ऊंचाई तय करती है।

    सदर तहसील क्षेत्र के झनझनपुर निवासी शिवम मद्धेशिया ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में 585 अंक प्राप्त कर सफलता हासिल की और अपने परिवार के वर्षों के संघर्ष को नई पहचान दी है। उनके पिता दिनेश मद्धेशिया झनझनपुर चौराहे पर चाय और समोसे की दुकान चलाते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने कभी बेटे की पढ़ाई में आर्थिक अभाव को बाधा नहीं बनने दिया। दुकान पर सुबह से देर शाम तक मेहनत कर उन्होंने बेटे के डाक्टर बनने के सपने को अपना लक्ष्य बना लिया।

    शिवम ने कक्षा एक से दस तक की पढ़ाई सेंट जोसेफ्स स्कूल, महराजगंज से तथा इंटरमीडिएट की शिक्षा सरदार वल्लभभाई पटेल इंटर कालेज, कसमरिया से पूरी की। इंटर की परीक्षा के बाद पिता के कहने पर वह लखनऊ जाकर नीट की तैयारी में जुट गए। परिवार की उम्मीदों और अपने सपनों को साकार करने के लिए उन्होंने पूरी मेहनत से पढ़ाई जारी रखी।

    शिवम ने बताया कि पहली बार नीट की परीक्षा देने के बाद उन्हें पूरा भरोसा था कि सफलता मिलेगी, लेकिन पेपर लीक होने के कारण परीक्षा निरस्त होने की खबर ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्हें लगा कि दो वर्षों की कठिन मेहनत बेकार हो गई। ऐसे समय में पिता दिनेश मद्धेशिया ने उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बेटे से कहा हिम्मत मत हारो।

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    मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। तैयारी जारी रखो, सफलता जरूर मिलेगी। पिता के इन शब्दों ने शिवम को नई ऊर्जा दी और उन्होंने दोबारा पूरी लगन के साथ तैयारी शुरू कर दी। करीब 40 दिन बाद दोबारा आयोजित परीक्षा में शिवम ने सफलता हासिल कर पिता के विश्वास और अपनी मेहनत को सार्थक कर दिखाया। आज उनकी सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की जीत बन गई है।

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    शिवम अपनी सफलता का श्रेय पिता दिनेश मद्धेशिया, माता ममता मद्धेशिया और अपने गुरुजनों को देते हैं। उनका कहना है कि उनका सपना एक अच्छा डाक्टर बनकर जरूरतमंद और गरीब लोगों की सेवा करना है। शिवम की सफलता आज पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मेहनत और हौसले के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।