Kargil Vijay Diwas 2026: कारगिल की चोटियों पर बहा था महराजगंज का लहू, अब बेटा व भाई निभा रहे फर्ज
महराजगंज के नौतनवा के दो वीर सपूतों, राइफलमैन पूरन बहादुर थापा और प्रदीप कुमार थापा ने कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके परिवारों ने भी देश ...और पढ़ें
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बाएं से नौतनवा कस्बे में प्रदीप थापा की प्रतिमा व छपवा में बलिदानी पूरन बहादुर थापा की प्रतिमा। जागरण
HighLights
नौतनवा के पूरन बहादुर थापा ने कारगिल में शहादत दी।
प्रदीप कुमार थापा भी पाकिस्तान फायरिंग में शहीद हुए।
दोनों परिवारों ने देश सेवा की विरासत जारी रखी।
अरविंद त्रिपाठी, नौतनवा। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर महराजगंज का भी लहू बहा था। जिले के दो रणबांकुरों ने सीमा की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। नौतनवा के अमर बलिदानी राइफलमैन पूरन बहादुर थापा और प्रदीप कुमार थापा की वीरता आज भी जिले के युवाओं में देशभक्ति, साहस और सेना में भर्ती होकर राष्ट्र सेवा का जज्बा पैदा करता है।
28 मई 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान राइफलमैन पूरन बहादुर थापा दुश्मनों से लोहा लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनका पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर नौतनवा पहुंचा था, तो हजारों लोगों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी थी। उन्हें नमन करने के लिए नौतनवा की सड़कों पर जन सैलाब उमड़ पड़ा था। भारत माता की जय.. पूरन थापा अमर रहे के नारे से आसमान गूंज उठा।
उनकी माता सुमित्रा देवी कांपते हाथों से बेटे के शव को जब गले लगाया, तो सबकी आंखें भर आई थीं। फिर अपने को संभालते हुए उन्होंने कहा था कि हमें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। देश की रक्षा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। दूसरे बेटे को भी सेना में भर्ती कर देश सेवा का संकल्प उन्होंने लिया था। पूरन थापा के परिवार ने भी उनकी विरासत को आगे बढ़ाया।
उनके छोटे भाई श्याम थापा वर्ष 2012 से भारतीय सेना में भर्ती होकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। छोटे बेटे के भर्ती होने पर माता सुमित्रा देवी के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि सीमा पर जाकर अपने बड़े भाई पूरन थापा के सपने को पूरा करना। जिस तरह से पूरन ने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, तुम भी पीछे नहीं हटना। वर्ष 2021 में माता सुमित्रा देवी का भी निधन हो गया था।
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पूरन के बड़े भाई अशोक थापा रोजगार के लिए विदेश गए हैं। पूरन थापा की शहादत का दर्द अभी ताजा ही था कि नौ नवंबर 1999 को नौतनवा के महेंद्रनगर निवासी जवान प्रदीप कुमार थापा भी पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में बलिदान हो गए। लगातार दो वीर सपूतों के बलिदान ने पूरे महराजगंज को झकझोर दिया।
दो बलिदान से जिले में देश भक्ति का तराना गूंजने लगा। उनके बलिदान ने जिले के युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण और राष्ट्र सेवा का संकल्प भी मजबूत किया। प्रदीप कुमार थापा के परिवार ने भी देश सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया। उनकी पत्नी हीरा देवी परिवार की मुखिया हैं। बड़े पुत्र अमर बहादुर थापा गोरखा रेजिमेंट से वर्ष 2016 में सेवानिवृत्त हुए और वर्तमान में डिफेंस सिक्योरिटी कोर में सेवा दे रहे हैं।
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छोटे पुत्र केहर बहादुर थापा गोरखा रेजिमेंट से 31 मार्च 2024 को सेवानिवृत्त हुए और वर्तमान में निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। आज नौतनवा में स्थापित दोनों अमर शहीदों की प्रतिमाएं सभी को राष्ट्रभक्ति, साहस और सर्वोच्च बलिदान का संदेश देतीं हैं।
कारगिल विजय दिवस पर प्रशासन, पूर्व सैनिक संगठन, जनप्रतिनिधि, स्कूली छात्र-छात्राएं और सामाजिक संगठन शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। महराजगंज के लिए ये दोनों वीर केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, त्याग और समर्पण की अमर मिसाल हैं।