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त्रासदी के पीछे चीन को जिम्मेदार मान रहे नेपाली, आक्रोश के साथ उठ रहे विरोध के सुर

Published: Sat, 29 Aug 2026 06:47 AM (IST)

नेपाल में बाढ़ त्रासदी के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, क्योंकि तिब्बत में बैरियर लेक टूटने की सूचना साझा करने में चीन ने लापरवाही बरती।

त्रासदी के पीछे चीन को जिम्मेदार मान रहे नेपाली।

त्रासदी के पीछे चीन को जिम्मेदार मान रहे नेपाली।

HighLights

  1. नेपाल में बाढ़ त्रासदी के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया गया।

  2. तिब्बत में बैरियर लेक टूटने की सूचना देने में चीन की लापरवाही।

  3. भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए भी यह एक सबक।

विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। नेपाल में चीन के खिलाफ आवाज उठने लगी है। बाढ़ त्रासदी के लिए लोग उसे जिम्मेदार मान रहें हैं। बुधवार को तिब्बत में बनी बैरियर लेक (बांधनुमा झील) टूटने के बाद चीन ने नेपाल से सूचना साझा करने में लापरवाही बरती, जिससे नेपाली नागरिकों में आक्रोश फैल गया है।

तिब्बत में 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो गया था, लेकिन अलर्ट तब भेजा गया जब झील टूट चुकी थी। विशेषज्ञों ने नेपाल की तैयारियों और सीमा पार आपदा की पूर्व चेतावनी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

रसुवा के प्रमुख जिला अधिकारी नरेंद्र परियार ने बताया कि उन्हें झील टूटने की जानकारी नेपाली सेना के माध्यम से मिली। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने कोई सूचना साझा नहीं की।

झील भरने के बाद ओवरफ्लो शुरू हुआ, और शाम को चीन ने तिब्बत में अपना बचाव अभियान शुरू किया। शुक्रवार सुबह झील टूटने लगी, तब चीन ने अभियान रोक दिया। इसके बाद दोपहर में नेपाल पुलिस ने अलर्ट जारी किया।

बुधवार को भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग नेपाल के अनुसार, बुधवार सुबह 8:40 बजे भोटेकोशी नदी में जल स्तर का आंकड़ा भेजा गया, लेकिन 8:50 बजे का आंकड़ा उपलब्ध नहीं हुआ। इसी बीच तिब्बत से आया तेज बहाव नेपाल में प्रवेश कर गया। नेपाल को इसकी जानकारी करीब 16 मिनट बाद मिली, जब बाढ़ का पानी तबाही मचाने लगा।

भैरहवा के व्यवसायी अजय कुमार गुप्ता, भारत-नेपाल मैत्री संघ रुपंदेही के अध्यक्ष श्रीचंद गुप्ता, उद्योग वाणिज्यिक संघ के बुटवल के सदस्य नवीन ढकाल और नवलपरासी निवासी कैलाश महतो ने कहा कि समय पर सूचना मिलने से हादसे के प्रभाव को कम किया जा सकता था। चीन ने सूचना देने में लापरवाही बरती, जिसके चलते नेपाल की जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

भारत के सीमावर्ती क्षेत्र के लिए भी बड़ा सबक

नेपाल की इस त्रासदी ने भारत-नेपाल सीमा से लगे महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। नेपाल की ओर से आने वाली नदियों और नालों में अचानक जलस्तर बढ़ने पर भारतीय क्षेत्र को सूचना मिलने में देरी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।

नौतनवा, निचलौल समेत सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में रियल टाइम जलस्तर की निगरानी और तत्काल अलर्ट व्यवस्था नहीं है। भारत, चीन और नेपाल के बीच मानसून में हिमालयी नदियों के जल स्तर से संबंधित विवरण दिन में दो बार साझा करने का प्रोटोकाल है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जाता है।

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