देवराली के खेतों से काठमांडू की मंडी तक, बाढ़ ने ऐसे बिगाड़ा नेपाल की आर्थिकी का गणित
नेपाल में बाढ़ ने कृषि, व्यापार और पर्यटन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा गई ...और पढ़ें

गजुरी में किसानों से मंगाकर रखीं गई सब्जियां। जागरण
HighLights
बाढ़ से सड़कें टूटीं, किसानों की फसलें खेतों में सड़ रही हैं।
काठमांडू की कालीमाटी मंडी में आवक 38% तक घटी।
रसुवा सीमा बंद होने से भारत-नेपाल व्यापार प्रभावित हुआ।
रजनीश त्रिपाठी नुवाकोट (नेपाल)। खेत में सब्जियां तैयार हैं, लेकिन रास्ते टूटे हैं। किसान के लिए फसल अब कमाई नहीं, चिंता बन गई है। दो-चार दिन में सब्जी खराब हो जाएगी, बाजार तक नहीं पहुंची तो लागत भी नहीं निकल पाएगी। इससे भी बड़ी चिंता उन खेतों की है, जिन्हें त्रिशूली और भोटेकोशी की बाढ़ ने बालू-गाद से पाट दिया है। इन खेतों में अगली फसल कब होगी, यह भी तय नहीं। गांव की खेती और आय पर पड़ी यह चोट अब शहर के बाजार तक पहुंच रही है।
काठमांडू के कालीमाटी बाजार में बाढ़ के बाद सब्जी-फल और मछली की 26 अगस्त को दैनिक आवक 771 टन से घटकर अगले दिन 477 टन रह गई। यानी एक दिन में ही 38 प्रतिशत की गिरावट हो गई।
देवराली के खेतों में इस टूटे संपर्क की कीमत साफ दिखाई दे रही है। नुवाकोट, बेलकोटगढ़ी में किसान सुब्बा तामांग के खेत में मिर्ची, गोभी और टमाटर तैयार हैं। सामान्य दिनों में गल्छी से गाड़ी आती थी और उचित दाम में सब्जियां लेकर चली जाती थी। अब खेत में तैयार सब्जियां आंखों के सामने सड़ रही हैं।
मेहनत से खड़ी की गई फसल अब कमाई की बजाय नुकसान का डर बन गई है। किसान अमृत प्रसाद नेपाल के सामने चिंता अगली फसल और आमदनी की है। तैयार उपज को समय पर उठाने वाला वाहन नहीं पहुंच रहा, जिससे बिक्री का भरोसा भी टूट गया है। पहले गल्छी से आने वाली गाड़ी उपज लेकर लौट जाती थी, अब रास्ते की अनिश्चितता ने पूरी बाजार व्यवस्था को रोक दिया है।
मुग्लिन के आगे भारत से आने वाले भारी मालवाहकों की आवाजाही बाधित होने से चावल, आटा, दाल, खाद्य तेल, चीनी, फल-सब्जी, दवाएं, एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति भी प्रभावित है।डीजल पेट्रोल की कमी राहत-बचाव कार्य को भी प्रभावित करेगी।
नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के केंद्रीय उपाध्यक्ष कृष्ण प्रसाद शर्मा बताते हैं कि कृष्ण भीर में भूस्खलन के कारण काठमांडू से अन्य भंसार कार्यालय से संपर्क टूट गया है। रसुवा का भंसार बंद हो गया है, जिसे शुरू होने में कम से कम दो साल लगेगा। त्योहार नजदीक आ रहे हैं। इससे सिर्फ व्यापार ही नहीं हर क्षेत्र में समग्र नेपाल प्रभावित होगा। नुकसान कितना हो रहा है, कितना होगा इसका अनुमान लगना अभी जल्दबाजी होगी।
एक नए व्यापारी नेता का कहना है कि नेपाल के कुल व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब 62.3 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-नेपाल वस्तु व्यापार 9.38 अरब डालर का रहा। मार्ग बंद होने का बड़ा प्रभाव बाजार पर पड़ने लगा है।
काठमांडू की कालीमाटी मंडी में फल, सब्जी और मछली की दैनिक आवक 771 टन से घटकर 477 टन रह गई। यानी एक दिन में करीब 38 प्रतिशत की गिरावट। यह कमी ऐसे समय में सामने आई है जब कृषि, वन और मत्स्य क्षेत्र, नेपाल की अर्थव्यवस्था में 24.03 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। इसका सकल मूल्यवर्धन करीब 1,393 अरब नेपाली रुपए है। मंडी की 38 प्रतिशत कम हुई आवक का असर नेपाल की बड़ी कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहा है।
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रास्ता बंद होने के चलते पर्यटन पर पड़ी चोट का भी आर्थिक आकार छोटा नहीं है। एक साल पहले पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय 88.66 अरब नेपाली रुपये थी। यानी 24.3 करोड़ रुपए रोजाना। बाढ़ के बाद रसुवा-तिब्बत मार्ग पर सैकड़ों पर्यटकों के से बाहरी पर्यटकों की संख्या में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। यद्यपि पर्यटन को कितने रुपये का वास्तविक नुकसान हुआ, इसका आधिकारिक आकलन अभी नहीं आया है।
यानी देवराली के खेत में सड़ती सब्जियों से शुरू हुई परेशानी कालीमाटी की मंडी, फुटकर दुकान और थोक गोदाम से होती हुई भारत-चीन सीमा तक पहुंच गई है। बाढ़ ने सिर्फ खेत, सड़क और पुल नहीं तोड़े हैं, उसने किसान की फसल से लेकर बाजार और नेपाल की पूरी आर्थिक आपूर्ति शृंखला की रीढ़ पर चोट की है।
