Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कभी घुसपैठियों को देता था पनाह, अब खुद शिकार हो रहा नेपाल

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 02:10 PM (IST)

    नेपाल में 2019 से 321 रोहिंग्या और पर्यटक वीजा पर आए 722 पाकिस्तानी, बांग्लादेशी व तुर्किए नागरिक लापता हैं, जिससे घुसपैठ का खतरा बढ़ गया है। तुर्किए ...और पढ़ें

    सोनौली सीमा पर वाहनों की जांच करते एसएसबी जवान। जागरण

    सोनौली सीमा पर वाहनों की जांच करते एसएसबी जवान। जागरण

    HighLights

    1. 2019 से 321 रोहिंग्या और 722 विदेशी नागरिक नेपाल से लापता।

    2. तुर्किए की संस्थाएं नेपाल में मस्जिदें बनवाकर जनसंख्या असंतुलन बढ़ा रहीं।

    3. भारत-नेपाल खुली सीमा का लाभ उठाकर घुसपैठिए सक्रिय हो रहे।


    विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। भारत विरोधी तत्वों का सुरक्षित पनाहगाह रहा नेपाल अब घुसपैठ के घुन से खुद खोखला हो रहा है। बड़ी संख्या में पाकिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या यहां अपनी पहचान छिपा कर रह रहें हैं। 2019 में नेपाल में शरणार्थी बनकर आए 321 रोहिंग्या अभी तक लापता हैं।

    आशंका है कि वे अपना हुलिया बदलकर नेपाल में रह रहे हैं या भारत में आ गए हैं। इसी तरह, पर्यटक वीजा पर नेपाल आए पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्किए के 722 लोगों का भी पता नहीं चल पा रहा है। तुर्किए भी नेपाल में पूरी तरह से सक्रिय है। उसके सहयोग से सीमा से सटे क्षेत्र में बड़ी संख्या में मस्जिदों और मदरसों का निर्माण हुआ है।

    कई मुस्लिम बहुल मोहल्ले भी बसाए गए हैं, जिससे नेपाल में जनसंख्या असंतुलन का खतरा उत्पन्न हो गया है। वहीं, नेपाल के कुछ जिलों में हुई हिंसा के बाद सोनौली सीमा पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां ऐसे लोगों का पता लगाने में जुट गई हैं।

    भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा के कारण बिना रोक-टोक लोगों की आवाजाही होती रहती है। इसी का लाभ उठाकर भारत विरोधी तत्व नेपाल का इस्तेमाल कर घुसपैठ कर रहे हैं। अभी तक घुसपैठ रोकने के लिए नेपाल की तरफ से कोई ठोस पहल न होने के कारण बड़ी संख्या में ऐसे लोग वहां बस गए हैं। नेपाल गृह मंत्रालय ने वर्ष 2019 में एक आंकड़ा जारी किया था।

    खबरें और भी

    सात वर्ष बीत जाने के बाद भी इनका पता नहीं चल पाया है। नेपाल की राजधानी काठमांडू के समीप दो सौ रोहिंग्या परिवार रह रहे हैं,जिन्हें संयुक्त राष्ट्र की तरफ से शरणार्थी का दर्जा मिला है। लापता लोगों में यहां के नागरिकों की संख्या अधिक है। नेपाल में जनसंख्या असंतुलन को बढ़ावा देने में तुर्किए की भूमिका निभा रहा है। तुर्किए की कैनसुयू नामक संस्था भारतीय सीमा क्षेत्र के करीब बसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में 2023 से कार्य कर रही है।

    रुपंदेही जिले के रोहिणी गांव पालिका वार्ड नंबर छह, ललितपुर , पकड़ियहवा, रोहिणी गांव पालिका विष्णुपुर में रह रही मुस्लिम आबादी के अधिकांश घरों में हैंडपंप लगाए गए हैं। यहां की हर परियोजना पर तुर्किए का झंडा और कैनसुयू संस्था का लोगो लगा है। सीमा क्षेत्र में संचालित 14 मदरसों में भी मदद की गई है। अप्रैल 2025 में कैनसुयू की तरफ से सीमा क्षेत्र में फंडिंग के लिए आठ लोगों को तीन-तीन करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे।

    यह भी पढ़ें- नेपाल में 321 रोहिंग्या शरणार्थी लापता भारत के लिए खतरा बनी खुली सीमा, सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना

    लुंबिनी क्षेत्र में सक्रिय संस्था को भी तुर्किए की तरफ से फंडिंग की गई थी। हिंदू संगठनों की शिकायत पर नेपाल पुलिस ने इस प्रकरण की जांच की थी। रुपंनदेही पुलिस के जन सूचना अधिकारी व डीएसपी कृष्ण कुमार चंद ने बताया कि अनाधिकृत रूप से नेपाल में रह रहे लोगों की जांच कराई जा रही है। ऐसे लाेगों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।

    विभिन्न सीमाओं से नेपाल में घुसे 526 रोहिंग्या
    हाल के दिनों में विभिन्न सीमा नाकों से 526 रोहिंग्या नेपाल में दाखिल हुए हैं। राजधानी काठमांडू स्थित पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार को हुई पत्रकार वार्ता में प्रवक्ता अभिनारायण काफ्ले ने रोहिंग्या के नेपाल प्रवेश के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेपाल में घुसे लोगों में 162 पुरुष, 148 महिलाएं और 216 बच्चे हैं। यह सभी लोग नेपाल के कपन, राममंदिर और ललितपुर के सुनाकोठी इलाके में रह रहे हैं।