नेपाल की सुरंगों में अटकी है सांसों की डोर, जिंदा है उम्मीद
नेपाल में त्रिशूली नदी पर बनी जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों को बचाने का अभियान 10 ...और पढ़ें

बाएं रसुवा में सुरंग के अंदर जाने का रास्ता बनाते बचाव दल के सदस्यl। सौ. नेपाली सेना
HighLights
नेपाल में 10 दिन से सुरंगों में फंसे लोगों का बचाव जारी।
त्रिशूली नदी बाढ़ से जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे सैकड़ों लोग।
चीनी नागरिक सहित चार लोगों को सुरक्षित निकाला गया, उम्मीद कायम।
विश्वदीपक त्रिपाठी, महराजगंज। त्रिशूली नदी के किनारे बनी जल विद्युत परियोजनाओं की अंधेरी सुरंगों में पिछले 10 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जंग जारी है। एक तरफ मलबे में दबी सांसें टूटने की कगार पर हैं तो दूसरी तरफ नेपाली सेना और भारत सहित अन्य देशों की आपदा बचाव टीमें उम्मीद की लौ जलाए हुए हैं।
अंधेरी सुरंगों में अटकी सांसों की डोर को बचाने की यह जद्दोजहद अभी लंबी चलेगी, लेकिन बीते दो दिनों में बचाई गई चार जिंदगियों ने यह साबित कर दिया है कि उम्मीद अब भी जिंदा है। शनिवार दोपहर 1:20 बजे का वह पल पूरे रेस्क्यू आपरेशन में नई ऊर्जा भर गया, जब अपर त्रिशूली-एक जल विद्युत परियोजना की सुरंग से चीनी नागरिक लू हैताओ को 10 दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया।
अंधेरे और कीचड़ से भरी सुरंग में 10 दिन तक मौत से लड़ने के बाद जब वह बाहर आया तो बचाव दल की आंखें नम थीं। नेपाली सेना ने उसे तुरंत स्ट्रेचर से अस्पताल पहुंचाया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। उम्मीद की यही किरण नुवाकोट जिले के बेत्रावती स्थित विदुर नगर पालिका के वार्ड नंबर 10 में भी दिखी।
यहां 10 दिनों से अपने ही घर के मलबे में दबी महिला चंडिका श्रेष्ठ को नेपाली सेना ने सुरक्षित निकाल लिया। जवान जब मलबा हटाकर उन तक पहुंचे तो महिला की आंखों में आंसू थे। चंडिका श्रेष्ठ का चार मंजिला मकान आधा मलबे में दब चुका था। 10 दिन तक एक छोटे से कोने में फंसी रहने के बाद उन्हें जिंदगी दोबारा मिली।
एक दिन पहले शुक्रवार को अपर त्रिशूली-3बी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो नेपाली कर्मियों—मैकेनिकल फोरमैन संजय शाह और मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महर्जन—को जिंदा बचाया गया था। दोनों को काठमांडू के छावनी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अस्पताल में संजय शाह की देखभाल कर रहे उनके भाई संजीव शाह ने बताया, "हमें ईश्वर और बचाव दल पर पूरा भरोसा था।" वहीं, कबीर महर्जन की पत्नी हरिशोभा महर्जन ने कहा, "डाक्टरों ने अभी उनसे बात करने से मना किया है, लेकिन आंखों के सामने उन्हें देखकर संतोष हो रहा है। अब लग रहा है कि इंतजार खत्म हुआ।"
रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने 11 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की जिंदगी पर ब्रेक लगा दिया है। इनमें से पांच प्रोजेक्ट ऐसे हैं, जहां लगभग 400 से अधिक कर्मचारी अब भी लापता हैं। रसुवा और नुवाकोट में त्रिशूली नदी के किनारे पिछले 10 दिनों से सैकड़ों परिवार टकटकी लगाए बैठे हैं।
किसी को अपने बेटे का इंतजार है तो किसी को पति और किसी को पिता का। हर एंबुलेंस की आवाज पर उनकी धड़कनें तेज हो जाती हैं। नेपाली सेना के मुताबिक, बचाव में सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों के मुहाने पर जमा 30 से 40 फीट ऊंचा मलबा और अंदर लगातार भर रहा पानी है। कई जगह आक्सीजन पाइप डाले गए हैं और थर्मल कैमरों से जिंदगी के संकेत तलाशे जा रहे हैं।
लगातार बारिश, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान बार-बार बाधित हो रहा है। अपर त्रिशूली-एक की सबसे ऊंची सुरंगों में बचावकर्मी अब तक 80 मीटर तक अंदर घुस पाए हैं, जबकि चिलिमे जल विद्युत परियोजना की सुरंग में 170 मीटर तक पहुंचने की कोशिश जारी है।
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रसुवा जिले के लांगटांग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में भी दिन-रात बचाव कार्य चल रहा है। ड्रोन और आधुनिक उपकरणों से सुरंगों की मैपिंग की जा रही है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण के ज्वाइंट मैनेजर सुरेश राउत ने बताया कि अपर त्रिशूली-3ए और 3बी में राहत व बचाव का सामान लगातार भेजा जा रहा है। सेना के जवान और विदेशी विशेषज्ञ संयुक्त रूप से अभियान में जुटे हुए हैं। जब तक आखिरी सुरंग खाली नहीं हो जाती, अभियान जारी रहेगा।
