90 रुपये प्रति लीटर वाला दूध भी नहीं शुद्ध, दूधिए ने बताया- क्यों कर रहे मिलावट? इन तरीकों से जांचें शुद्धता
उत्तर प्रदेश सरकार ने मिलावटी एनालाग डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया है, लेकिन महोबा में अभी भी मिलावटी दूध धड़ल्ले से बिक रहा है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
UP सरकार ने एनालाग डेयरी उत्पादों के निर्माण, बिक्री पर प्रतिबंध लगाया।
महोबा में मिलावटी दूध और उत्पादों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है।
मिलावटी दूध पीने से पाचन, लिवर, किडनी रोग और कैंसर का खतरा।
जागरण संवाददाता, महोबा। यदि आप दूध ले रहे हैं तो सावधान हो जाइए, कहीं आप मिलावटी दूध तो नहीं ले रहे। ऐसा है तो यह आपके स्वास्थ्य पर विपरीत असर डला सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एनालाग डेयरी उत्पादों (पनीर, घी, खोया, क्रीम और छेना) के निर्माण, भंडारण और खुली बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
सरकार के आदेश के अनुसार, शुद्ध दूध से बनी चीजों की जगह बिना स्पष्ट जानकारी के एनालाग उत्पादों को बेचना सेहत से खिलवाड़ है। नियमों का उल्लंघन करने पर प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित करने, उत्पाद जब्त कर नष्ट करने और एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसके बाद भी जिले में मिलावटी दूध के साथ ही अन्य सामग्री धड़ल्ले से बेची जा रही है।
जिले की करीब नौ लाख की आबादी में करीब ढाई लाख लीटर दूध की खपत होती है। शहर की बात करें तो यहां 60 हजार लीटर की जरूरत है, लेकिन उत्पादन इतना नहीं होता। जाहिर है कि दूध में मिलावट की जाती है और धड़ल्ले से इसे 70-90 रुपये प्रति लीटर बेचा जा रहा है।
नाम न छापने पर एक दूधिए ने बताया कि दूध की ज्यादा मात्रा करने के लिए सबसे सरल उपाय पानी मिलाना है। वहीं डिर्टजेंट व यूरिया को मिलाया जाता है, जिससे इसका झाग और कलर साफ बना रहे। स्टार्ज और ग्लूकोज भी मिलाया जाता है, जिससे यह गाढ़ा बना रहे।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. योंगेंद्र रजावत ने बताया कि मिलावटी दूध पीने से पाचन तंत्र खराब होता है। लिवर और किडनी की गंभीर बीमारियां होना और कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों का खतरा बढ़ जाता है।
लोगों को चाहिए कि दूध की पहचान कर इसका सेवन करें। खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल मिश्रा ने बताया कि समय-समय पर दूध के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे जाते है। अभियान चलाकर औचक जांच की जाएगी।
ऐसे करें शुद्धता की पहचान
- पानी की जांच- किसी सीधी या चिकनी सतह पर दूध की एक बूंद टपकाएं। शुद्ध दूध धीरे बहेगा और सफेद निशान छोड़ेगा, जबकि पानी मिला दूध तुरंत बह जाएगा।
- डिटर्जेंट की जांच- थोड़ी मात्रा में दूध लेकर उसे बराबर पानी के साथ हिलाएं। अगर ज्यादा देर तक झाग या झाग की परत बनी रहे, तो डिटर्जेंट हो सकता है।
- स्टार्च की जांच- दूध में आयोडीन मिलाने पर यदि रंग नीला हो जाए, तो उसमें स्टार्च की मिलावट है।
यह भी पढ़ें- भैंस के दूध में पानी और केमिकल मिलाकर बेचा जा रहा 'गाय का दूध', सेहत के लिए कितना खतरनाक?
