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    महोबा में बर्खास्त सिपाही ने साथियों संग मिलकर सराफा कारोबारी से की थी 22 लाख की लूट, पांच दोषियों को 7-7 साल की सजा

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 03:51 PM (GMT+05:30)

    महोबा में एक बर्खास्त सिपाही ने अपने साथियों के साथ मिलकर सराफा कारोबारी से 22 लाख रुपये लूटे थे। इस मामले में न्यायालय ने पांच दोषियों को सात-सात साल ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. बर्खास्त सिपाही ने साथियों संग 22 लाख की लूट की।

    2. सराफा कारोबारी को ट्रेन से उतारकर मारपीट कर लूटा गया।

    3. पांच दोषियों को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा।

    जागरण संवाददाता, महोबा। बर्खास्त सिपाही ने अपने पांच अन्य साथियों के साथ मिलकर सराफा कारोबारी को ट्रेन से उतारा और इसके बाद स्टेशन में उसके साथ मारपीट की। उसे 5-6 डंडे मारकर 22 लाख की नकदी से भरा बैग लूट लिया था। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नं-एक / विशेष न्यायाधीश ध्रुव राय ने अपना फैसला सुनाते हुए पांच दोषियों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व 10-10 हजार के जुर्माना की सजा सुनाई है। न्यायालय में विचारण दौरान सिपाही की मृत्यु हो गई थी।

    सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता तेजप्रताप पचौरी ने बताया कि जनपद बांदा के कैलाशपुरी कालोनी बन्यौटा निवासी संजय अग्रवाल ने थाना कुलपहाड़ में 12 दिसंबर 2012 को तहरीर दी थी। जिसमें बताया था कि 11 दिसंबर 2012 की शाम करीब साढ़े छह बजे वह अपने साथी भूदीप उर्फ रानू कुमार व विनय कुमार मिश्रा निवासीगण बांदा के साथ ट्रेन से 35 किग्रा चांदी लेकर झांसी होते हुए शाम करीब छह बजे आगरा पहुंचा। वहां रामभाई दलाल निवासी चौबे फाटक को उन्होंने चांदी दी और 22 लाख रुपये लिए। गड्डी में एक-एक हजार के 22 नोट थे।

    12 दिसंबर की रात्रि तीनों लोग वहां से बांदा के लिए महाकौशल एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना हुए। रेलवे स्टेशन मऊरानीपुर में तीन लोग बोगी में सवार हुए, जो पुलिस की वर्दी में थे। इसमें एक युवक खुद को एसआई, दूसरे को सिपाही और तीसरे को फालोवर बता रहा था। एसआई का चेहरा खुला था और शेष दोनों लाेग अपना चेहरा मफलर से बांधे थे। खुद को एसआई बताने वाले युवक ने उसे एक कम्प्यूटराइज्ड पेपर दिखाया, जिसमें उसका नाम व पता लिखा था। साथ ही फोटो भी लगी थी। इन लोगों ने कहा कि उसके नाम का वारंट है। इसके बाद तीनाें लोगों ने उसे हरपालपुर मप्र स्टेशन पर उसे उतार लिया और मारपीट की।

    स्टेशन के बाहर लाकर मारुति वैन में बैठाया। ये लोग महोबकंठ व पनवाड़ी होते हुए कुलपहाड़ की ओर चल दिए। रास्ते में ग्राम सुगिरा के पहले वैन रोकी और मारपीट शुरू कर दी। रुपयों से भरा बैग न देने पर 5-6 डंडे मारे। इन लोगों ने बैग छीन लिया और भाग निकले। उन्होंने तीनों लोगों के मोबाइल ट्रेन में ही छीन लिए थे। सूचना पर थाना कुलपहाड़ में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना शुरू की और घटना में बर्खास्त सिपाही अब्दुल रसीद उर्फ लल्ला निवासी मुहल्ला सिकंदरपुरा, मुन्ना पुत्र नत्थू निवासी ग्राम पड़री थाना बबेरू बांदा, उवैद उर्फ बोरा उर्फ प्रधान निवासी गोयरा मुगली थाना मटौंध बांदा, विनय कुमार मिश्रा निवासी स्वराज कालोनी बांदा आदि के नाम सामने आए।

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    पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में विचरित किए। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नं-एक / विशेष न्यायाधीश ध्रुव राय ने सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। अधिवक्ता तेजप्रताप पचौरी ने बताया कि मुन्ना पुत्र नत्थू, मरिया उर्फ बब्बू, उवैद, मुनीर खां व विनय कुमार मिश्रा को दोषी पाया गया। इन्हें सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व 10-10 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। न्यायालय में विचारण के दौरान सिपाही अब्दुल रसीद की मौत हो गई थी। पुलिस विभाग में सेवा देते हुए वह पूर्व में कई मामलों में लिप्त पाया गया था, इसलिए इसे बर्खास्त कर दिया गया था। वह बांदा समेत अन्य जनपदों में तैनात रहा।