दारोगा हप्पू सिंह की प्रधानमंत्री से अपील....अरे दादा, नमस्कार! बुंदेलखंड को राज्य बना दीजिए
टीवी कलाकार हप्पू सिंह ने बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की मांग का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है। यह मांग पूर्व सांसद गंगा ...और पढ़ें

टीवी कलाकार हप्पू सिंह। इंटरनेट मीडिया
HighLights
टीवी कलाकार हप्पू सिंह ने बुंदेलखंड राज्य की मांग का समर्थन किया।
पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत फिर से इस मुहिम को चला रहे हैं।
बुंदेलखंड राज्य आंदोलन 1989 में शंकर लाल मेहरोत्रा ने शुरू किया था।
जागरण संवाददाता, महोबा। महोबा से बुंदेलखंड अलग राज्य की मांग उठने लगी है। इसे लेकर कस्बा व तहसील क्षेत्रों में बैठकों का दौर भी चल रहा है। अब इस मुहिम में बुंदेली कलाकार भी शामिल हो गए हैं। टीवी हास्य कलाकार हप्पू सिंह ने भी इसे लेकर सरकार से मांग की।
इंटरनेट मीडिया पर उन्होंने वीडियो प्रचलित किया। जिसमें वह कह रहे हैं कि अरे दादा, नमस्कार, हम बोल रहे हैं आपके चहेते दारोगा हप्पू सिंह यानि योगेश त्रिपाठी। हमें हप्पू की उल्टन पुल्टन व भाभी जी घर पर हैं, में तो आपने देखा ही होगा। इसमें बुंदेलखंड की झलक दिखती है। हमारी बुंदेलखंड की जो भाषा और संस्कृति है, वह बहुत प्यारी है।
उन्होंने कहा, पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत एक बहुत बड़ी मुहिम चला रहे हैं कि बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाया जाए। मैं बुंदेलखंड के सभी कलाकारों की तरफ से सरकार से विनती करता हूं कि बुंदेलखंड को राज्य बनाया जाए। मैं प्रधानमंत्री जी से विनती करूंगा कि हम सभी बुंदेलखंडवासी आपके आभारी रहेंगे, बुंदेलखंड को राज्य बना दीजिए.....धन्यवाद।
जानें पूरा मामला
इसके पूर्व सबसे पहले शंकर लाल मेहरोत्रा ने बुंदेलखंड राज्य के लिए संघर्ष शुरू किया था। उनका जन्म नौ मार्च, 1948 को झांसी के प्रतिष्ठित कारोबारी सुंदर लाल मेहरोत्रा के घर हुआ था। जिस बुंदेलखंड राज्य आंदोलन को शंकर लाल मेहरोत्रा ने 17 सितंबर, 1989 में मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित धवर्रा से शुरू किया था, उस आंदोलन का आज विस्तार हो चुका है।
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बुंदेलखंड राज्य का सपना अधूरा
2000 में उत्तराखंड, झारखंड व छत्तीसगढ़ राज्य तो बने लेकिन बुंदेलखंड राज्य का सपना पूरा नहीं हुआ। बाद में इसी सदमे में 22 नवंबर, 2001 को शंकर लाल का निधन हो गया था। आंदोलन के लिए धन की कमी पड़ने लगी तो उन्होंने नौगांव में संचालित डिस्टिलरी फैक्ट्री बेच दी। कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। आंदोलन को गति देने के लिए पूरे बुंदेलखंड में सभाएं, धरना प्रदर्शन शुरू करवाया। 1994 में मध्यप्रदेश विधानसभा और 1995 में लोकसभा में पर्चा फेंक कर बुंदेलखंड राज्य की मांग की। अब पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत ने फिर से इस मुद्दे को उठाया है। उनके द्वारा गांव-गांव जाकर सभाएं की जा रही है।