टीबी के बाद मैनपुरी में हेपेटाइटिस B और C का बढ़ता खतरा: चार महीने में 333 मरीज मिले, ऐसे रखें सेहत का ख्याल
मैनपुरी में पिछले चार महीनों में 333 हेपेटाइटिस बी और सी के मामले सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग चिंतित ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
मैनपुरी में चार माह में 333 हेपेटाइटिस मरीज मिले।
हेपेटाइटिस बी के 181 और सी के 152 मामले दर्ज।
दूषित खानपान, असुरक्षित आदतें संक्रमण का मुख्य कारण।
जागरण संवाददाता, मैनपुरी। एक समय बढ़ते टीबी रोगियों पर तो स्वास्थ्य विभाग ने नियंत्रण पा लिया है। परंतु अब धीरे-धीरे हेपेटाइटिस बी और सी पैर पसारने लगा। जिससे बढ़ते संक्रमण को लेकर विभाग चिंतित है। जिले में चार माह के अंदर 333 मरीज हेपेटाइटिस के सामने आए हैं। जिनमें हेपेटाइटिस बी के 181 और सी के 152 मरीज पाजिटिव पाए गए हैं। इन रोगियों का विभाग की निगरानी में इलाज चल रहा है।
परंतु सबसे बड़ी बात ये है कि जिले में दिनोंदिन बढ़ते मरीजों को लेकर विभाग ने ना तो अलर्ट जारी किया है और ना ही संक्रमण फैलने के कारण का पता लगा पा रहा है।
संक्रमित में 181 बी और 152 हैं हेपेटाइटिस सी के हैंं 151 रोगी
जिले में हेपेटाइटिस का संक्रमण तेजी से अपने पांव पसार रहा है। ये बात जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड की जानकारी के बाद सामने आई है। ये आंकड़े न सिर्फ चिंताजनक हैं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल माह से लेकर जुलाई तक जिले में 333 लोग हेपेटाइटिस की चपेट में आए हैं। जिनमें 181 हेपेटाइटिस बी 151 रोगी हैं। संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में रोजाना हेपेटाइटिस की जांच और इलाज के लिए मरीज पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग रोगियों का इलाज के साथ कर रहा लोगों को जागरूक
विशेषज्ञों का मानना है कि दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जीवनशैली, दूषित खानपान और असुरक्षित आदतें लोगों को इस जानलेवा बीमारी का शिकार बना रही हैं। सर्जन डा. गौरव पारिख के अनुसार फास्ट फूड और दूषित खानपान खानपान के कारण लिवर संबंधी समस्याओं से लोग ग्रसित हो रहे हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।
हेपेटाइटिस के मुख्य लक्षण
- हेपेटाइटिस बीमारी फैलने की मुख्य वजह दूषित पानी और बाहर का असुरक्षित खाना है
- इसके अलावा बिना जांचा खून चढ़वाने, संक्रमित सूई या एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल करने से हेपेटाइटिस बी और सी फैलता है
- असुरक्षित शारीरिक संबंध और टैटू बनवाते समय संक्रमित सुई का प्रयोग, अत्यधिक थकान, लगातार बुखार आना
- आंख और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), भूख न लगना, जी मिचलाना और पेट के दाहिने हिस्से में दर्द होना
- इसके अलावा गहरे पीले रंग की पेशाब होना हैं
- हमेशा उबला और साफ पानी पीएं, ताजा खाना खाएं। समय-समय पर जांच कराएं। जरा भी लक्षण महसूस हों तो सरकारी अस्पताल में ही इलाज लें
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जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस की निश्शुल्क जांच और इलाज उपलब्ध है। लोग इसके प्रति स्वयं भी जागरूक हों। यदि कोई भी व्यक्ति पीलिया और लिवर से जुड़ी समस्या से पीड़ित हो तो वह तत्काल सरकारी अस्पताल में जाकर जांच कराए। खानपान में सुधार और सतर्कता से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है।
