कांस्य फेस्टिवल में छाई वृंदावन की बेटी आरती क्षेत्रपाल, रेड कारपेट पर भारतीय परिधान में जगाई आध्यात्म की राह
वृंदावन की आरती क्षेत्रपाल ने कांस्य फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर भारतीय आध्यात्मिकता का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने माला, झोली और श्रीमद्भगवद्गीत ...और पढ़ें

कांस्य फिल्म फेस्टबिल में हाथ में श्रीमद्गीता एवं माला झोली लिए अभिनेत्री आरती क्षेत्रपाल। - फोटो: स्वयं द्वारा।

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संवाद सहयोगी, वृंदावन। पाश्चात्य की छांव में आयोजित होने वाले कांस्य फिल्म फेस्टिवल में पहली बार है कि धार्मिक भजनों व सीरियल में अहम भूमिका निभाने वाली वृंदावन की बेटी आरती क्षेत्रपाल को रेडकारपेट पर चलने का मौका मिला।
जब धार्मिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आरती को कांस्य फिल्म फेस्टिवल में आमंत्रण मिला तो पाश्चात्य की चकाचौंध भरी दुनिया के सामने भी आरती के कदम नहीं डगमगाए और हाथ में माला-झोली व श्रीमद्गीता लिए रेडकारपेट से गुजरी तो फैशन में आस्था, भक्ति की कला, भारतीय आध्यात्मिकता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरव दिलाने जैसा दिखाई दिया।
वृंदावन में जन्मी हैं आरती
वृंदावन में जन्मी अभिनेत्री आरती क्षेत्रपाल जो कि फिल्मी दुनिया में अपनी कड़ी मेहनत व लगन के साथ अपना कैरियर बना रही हैं। आरती ने कांस्य फिल्म फेस्टिवल में अपनी पहली एंट्री भगवान श्रीराधाकृष्ण के धाम को समर्पित की। आरती द्वारा तैयार किए गए सीरियल सुलक्षणा मोगा काउच्योर निधिवन और यमुनाजी का फेस्टिवल में प्रतिनिधित्व कर रहा था। जब आरती फेस्टिवल में पहुंचीं तो पीले परिधान में एक हाथ में माला झोली व दूसरे हाथ में श्रीमद्गीता लिए थीं।
फेस्टिवल में पहली बार था कि रेड कारपेट पर पवित्र श्रीमद्गीता को भारत के आध्यात्मिक ज्ञान व सनातन मूल्यों के प्रतीक के रूप में आरती ने प्रस्तुत किया। गले में तुलसी की कंठीमाला, हाथ में मालाझोली और एक पारंपरिक थैला भी साथ में लिया। जो वैष्णव संस्कृति व वृंदावनी साधना का प्रतीक माना जाता है।
पहनावा भारतीय फैशन डिजाइनर सुलक्षणा मोगा ने तैयार किया
आरती की मां अनीता क्षेत्रपाल ने बताया फिल्म फेस्टिवल के लिए आरती क्षेत्रपाल के लिए फिल्म फेस्टिवल का पहनावा भारतीय फैशन डिजाइनर सुलक्षणा मोगा ने तैयार किया था। जबकि जप का बैग प्रियंका बंसल ने डिजाइन किया।
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सपने से कम नहीं है अनुभव
दूरभाष पर अभिनेत्री आरती ने कहा फिल्म फेस्टिवल में पहला पदार्पण का मेरा अनुभव सपने से कम नहीं, यह हर उस इंसान के लिए है, जो ईश्वर में विश्वास रखता है। हमारे गुरुओं और संतों के लिए जो हमें जप करना सिखाते हैं। वेद व्यासजी के लिए जिन्होंने भगवद गीता लिखी। कहा मेरी मां ने श्रीकृष्ण का जप व उनसे प्रेम करना सिखााया। मेरी बहन भारत में रहकर रातभर मेरे लिए काम करती रही।