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    मेहनत और संघर्ष से लिखी कामयाबी की कहानी: गरीबी को हराकर IIT गुवाहाटी पहुंचा नौहझील का लाल

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 03:15 PM (IST)

    नौहझील के नवीन कुमार ने गरीबी और संघर्षों को पार कर जेईई में 1837वीं रैंक हासिल की और आईआईटी गुवाहाटी में सिविल इंजीनियरिंग के लिए चयनित हुए। पिता की ...और पढ़ें

    बाजना इंटर कॉलेज में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान नवीन

    बाजना इंटर कॉलेज में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान नवीन

    HighLights

    1. नवीन कुमार ने जेईई में 1837वीं रैंक हासिल की

    2. आर्थिक तंगी के बावजूद आईआईटी गुवाहाटी में चयन

    3. मां और गुरुजनों के सहयोग से मिली सफलता

    संवाद सूत्र, नौहझील (मथुरा)। कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो गरीबी और तंगहाली भी रास्ता नहीं रोक सकती। इसे सच कर दिखाया है बाजना इंटर कालेज मोरकी के छात्र नवीन कुमार ने। नवीन ने विपरीत परिस्थितियों और आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई में ऑल इंडिया 1837 वीं रैंक हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

    नवीन का चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी गुवाहाटी में हुआ है। वह शनिवार को सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए गुवाहाटी रवाना हो गए।

    पिता की मृत्यु के बाद मां व नवीन ने मजदूरी कर जारी रखी पढ़ाई

    नवीन की यह सफलता साधारण नहीं है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। घर का खर्च चलाने और अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए नवीन स्कूल से आने के बाद खेतों में मजदूरी करते थे और दूसरों के घरों में जाकर पुताई का काम भी करते थे। दिनभर पसीना बहाने के बाद, रात को जब दुनिया सोती थी तब नवीन मोमबत्ती और टार्च की रोशनी में घंटों पढ़ाई करते थे।

    जेईई में 1837 वीं रैंक पाकर आईआईटी गुवाहाटी में मिला प्रवेश

    नवीन ने अपनी शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूल से पूरी की है। उन्होंने 10 वीं में 87.5 प्रतिशत और 12 वीं में 84 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा पहले ही मनवा लिया था। सफलता के बाद बाजना इंटर कॉलेज में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान नवीन भावुक हो गए। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और अपने गुरुजनों को देते हुए कहा कि विद्यालय के शिक्षकों का मार्गदर्शन और सहयोग न मिलता, तो आज वह इस मुकाम पर नहीं पहुंच पाता।

    नवीन ने अपनी सफलता को अपनी मां के संघर्षों और गुरुओं के आशीर्वाद का परिणाम बताया। विद्यालय स्टाफ और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने नवीन को मिठाई खिलाकर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की

    तंगी के चलते पिता ने की थी आत्महत्या

    नवीन कुमार का परिवार मूल रूप से नौहझील क्षेत्र के गांव नवीपुर का रहने वाला है। नवीन के दादा खुशीराम कोरी पापड़ बेचकर घर चलाते थे। नवीन के सिर से अचानक पिता का साया भी उठ गया था। गरीबी और तंगी के चलते पिता ने मौत को गले लगा लिया था। मां शीतल ने खेत में दिहाड़ी मजदूरी कर तीन बच्चों काे पाला। नवीन की सफलता से अब जाकर मां की कठोर तपस्या का फल मिला है।

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    मदद को आगे आए हाथ

    मेधावी नवीन की परेशानी देख विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अरविंद कुमार शर्मा और विद्यालय के समस्त स्टाफ ने संवेदनशीलता दिखाते हुए आर्थिक मदद की। प्रधानाचार्य ने नवीन की आगे की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रिया में सहयोग के लिए अपनी ओर से 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता की। साथ ही आगे की पढ़ाई में सहयोग का भी भरोसा दिलाया।

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