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Janmashtami 2026: अफजाल व इकबाल की डिजाइनर पोशाक पहनेंगे कान्हा, वृंदावन के कारीगर बने हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल

Published: Wed, 02 Sep 2026 02:23 PM (IST)

वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए मुस्लिम कारीगर आकर्षक पोशाकें तैयार कर रहे हैं। यह कार्य हिंदू-मुस्लिम एकता ...और पढ़ें

HighLights

  1. वृंदावन में मुस्लिम कारीगर बनाते हैं कृष्ण की पोशाकें।

  2. यह कार्य हिंदू-मुस्लिम एकता का मजबूत संदेश देता है।

  3. पोशाकें देश-विदेश में भेजी जाती हैं, लाखों तक कीमत।

संवाद सहयोगी, वृंदावन (मथुरा)। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है तो केवल मथुरा और ब्रज ही नहीं देश दुनिया के घर-घर में भगवान श्रीकृष्ण चार सितंबर को प्रकटेंगे, ठाकुरजी के प्राकट्योत्सव पर उन्हें नई और आकर्षक पोशाक भी धारण कराई जाएगी। वृंदावन पोशाक कारोबार का देश में बड़ा केंद्र भी है।

लेकिन, यहां की खास बात यह है कि ठाकुरजी की पोशाक तैयार करने में मुस्लिम समुदाय का हमेशा से बड़ा हाथ रहा है। ठाकुर जी की डिजाइनर पोशाक अफजाल और इकबाल बना रहे हैं। कई पीढ़ियों से मुस्लिम परिवार इस कारोबार से जुड़े हैं।

वृंदावन की धरती पर दे रहे हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश

यह भगवान श्रीराधाकृष्ण की लीलाभूमि हैं, यहीं से सोलह कलाओं के अवतारी भगवान श्रीकृष्ण ने दुनिया को प्रेम का संदेश दिया था। आज भी भगवान श्रीकृष्ण के संदेश की संवाहक वृंदावन की धरती पर हिंदू मुस्लिम सद्भाव की मिसाल दी जा रही है। यहां भगवान श्रीकृष्ण, राधारानी व अन्य देवी-देवताओं की पोशाक तैयार करने वाले कारीगरों में हिंदुओं के साथ मुस्लिम परिवार भी कई पीढ़ियों से लगे हैं।

जन्माष्टमी पर देश-दुनिया से आए आर्डर

पोशाकों को तैयार करने में मुस्लिम कारीगर जुड़े हुए हैं। महीन कारीगरी, मोतियों, स्टोन और आकर्षक डिजाइन से तैयार की जा रही इन पोशाकों में इस बार ठाकुरजी की अलग ही छटा देखने को मिलेगी। इन पोशाकों की कीमत 10 रुपये से शुरू होकर लाखों रुपये तक पहुंचती है। जन्माष्टमी पर देश दुनिया से पोशाक के ऑर्डर मिले हैं तो कारीगर दिन रात काम में जुटे हैं।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर ज्यादातर मुस्लिम बनाते हैं पोशाक

वृंदावन में लगभग 50 प्रतिशत मुस्लिम ठाकुरजी और श्रीराधारानी की पोशाक तैयार करते हैं। हाथ से ठाकुरजी की जरदोजी की पोशाक तैयार करने वाले अफजाल बताते हैं कि ठाकुरजी की पोशाक में जरी, मोती, नग और खासतौर से शीशे व स्टोन का काम किया जाता है।

कारीगर इकबाल ने बताया पहले डिजाइन बनाकर कागज पर स्केच तैयार करते हैं। इसके बाद इसमें जरी, लाल मोती, स्टोन व मखमल, बादला, काउनी आदि की कढ़ाई की जाती है।

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पोशाकों की माांग न्यूयार्क से लेकर थाईलैंड तक

पोशाक तैयार करने वाले इकबाल ने बताया पोशाक तैयार करने का ऑर्डर उन्हें एजेंट से मिलता है। उनके द्वारा बनाई गई पोशाक अमेरिका, ब्रिटेन, हांगकांग, नेपाल, श्रीलंका, बाली, आस्ट्रेलिया, न्यूयार्क, थाईलैंड तक जाती हैं।

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