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    ठाकुर बांकेबिहारी ने फूलबंगला में बैठ दिए भक्तों को दर्शन, नए समय पर खुले मंदिर के पट

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 07:41 AM (IST)

    ठाकुरजी को गर्मी से बचाने के लिए भोग में बदलाव और फूलबंगला सजाए जा रहे हैं। पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे व्यवस्था बनाए रखने में गार्डों क ...और पढ़ें

    वृंदावन में कामदा एकादशी पर शुरू हुए दिव्य फूलबंगला दर्शन।

    वृंदावन में कामदा एकादशी पर शुरू हुए दिव्य फूलबंगला दर्शन।

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    संवाद सहयोगी, वृंदावन। गर्मी की आहट होने के साथ ठाकुरजी को शीतलता देने को सेवायतों ने ठाकुरजी की सेवा में बदलाव कर दिया। भोग में गरिष्ठ पदार्थ और मेवा की मात्रा में कमी कर दी गई है। गर्मी का असर ठाकुरजी पर न हो, इसके लिए मंदिर में अब फूलबंगला सजाए जा रहे हैं।

    विभिन्न प्रकार के फूलों से सजे बंगला में विराजमान होकर ठाकुर बांकेबिहारी भक्तों को दर्शन दे सकें और उन्हें गर्मी का भी एहसास न हो। रविवार को पहले दिन फूलबंगला में आराध्य बांकेबिहारी बिराजे तो दर्शन को भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।

    कामदा एकादशी पर दर्शन को उमड़ी भक्तों की भीड़ से बिगड़े हालात

    ठाकुर बांकेबिहारी की भोगराग सेवा मौसम परिवर्तन के साथ बदलती रहती है। होली के बाद जब गर्मी की शुरूआत में ठाकुरजी के भोग में गरिष्ठ पदार्थों की मात्रा कम करके दूध, दही की मात्रा बढ़ा दी गई। वहीं भोग में अर्पित होने वाली मेवा की मात्रा में भी कमी कर दी गई है।

    ठाकुरजी को दर्शन देते समय शीतला बनी रहे, इसके लिए कामदा एकादशी से फूलबंगला सजाने शुरू कर दिए हैं। अब अगले चार महीने तक ठाकुर बांकेबिहारी सुबह और शाम अलग-अलग तरीके से सजे विभिन्न प्रकार के फूलों के बंगला में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

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    जगमोहन में विराजे आराध्य बांकेबिहारी के पूरे प्रांगण में दर्शन मिलने से श्रद्धालुओं को मिली राहत

    कामदा एकादशी पर रविवार की सुबह मंदिर के पट खुले तो जगमोहन में सजे फूलबंगला में विराजे ठाकुर बांकेबिहारी की झलक पाकर भक्त आल्हादित हो उठे। मंदिर परिसर बांकेबिहारी के जयकारे से गूंज उठा। मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु आराध्य को निहारते रहे गए। उन्हें मंदिर से बाहर निकालने के लिए गार्डों को मशक्कत करनी पड़ी। भक्तों की जितनी संख्या मंदिर के अंदर रेलिंग में थी, उससे अधिक संख्या मंदिर के बाहर दर्शन के लिए अपने नंबर का इंतजार कर रही थी।

     

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    सुरक्षा गार्डों को करनी पड़ी मेहनत

    मंदिर की व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए सुरक्षा गार्डों को दिनभर मशक्कत करनी पड़ी। मंदिर की चहारदीवारी व आंगन को सुगंधित फूलों से बंगला सजाया गया था। शाम साढ़े पांच बजे मंदिर के पट खुले तो भक्तों का रेला एकबार फिर दर्शन के लिए मंदिर में उमड़ पड़ा। गलियों में भी भक्तों की जनसमूह दिखाई दे रहा था।

    रायबेल के फूलों का अधिक प्रयोग

    फूल बंगले में ठाकुरजी जगमोहन में कलात्मक तरीके से बनाए गए बंगले में विराजमान होते हैं। साधारण बंगलों में लगने वाले फूलों की आपूर्ति मथुरा या वृंदावन से ही हो जाती है। लेकिन, बड़े बंगलों के लिए दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता, बैंगलुरू तक से फूल मंगाए जाते हैं। अधिकतर बंगले में रायबेल के फूलों का प्रयोग किया जाता है। साथ ही केले के तने का अंदर का मुलायम छिलका इस्तेमाल किया जाता है।

    फूलबंगला के साथ नए समय पर खुले मंदिर के दर्शन

    • ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर उच्चाधिकार प्रबंधन समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए तय किए गए नये दर्शन समय का कामदा एकादशी के दिन सेवायत ने पालन किया। भक्तों को करीब डेढ़ घंटे अधिक समय तक दर्शन मिल सके।
    • ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने कहा रविवार को पहला फूलबंगला सजाया गया। ऐसे में मंदिर के सेवाधिकारी मुकुंद गोस्वामी ने समिति का सहयोग करते हुए नए समय पर दर्शन खोलने के पूरे प्रयास किए।
    • रविवार की सुबह सवा सात बजे मंदिर के पट दर्शन के लिए खुले। दोपहर साढ़े बारह बजे मंदिर के पट बंद हुए। बताया सेवाधिकारी मुकुुंद की अगले 20 दिन तक सेवा है, ऐसे में नए दर्शन समय का पालन होने की पूरी उम्मीद है।


    फूलबंगला में होता है इन फूलों का उपयोग

    ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में कामदा एकादशी 29 मार्च से शुरू होकर 12 अगस्त तक फूलबंगला सजाए जाऐंगे। भक्तों द्वारा फूलबंगला की सेवा की जाती है। इसके लिए पूरे साल के फूलबंगला इस बार भी पहले ही बुक हो चुके हैं। कामदा एकादशी से शुरू होकर हरियाली अमावस 12 अगस्त तक सुबह और शाम अलग-अलग तरह के फूलबंगला में विराजमान होकर ठाकुर बांकेबिहारी भक्तों को दर्शन देंगे।

    इस बीच केवल अक्षय तृतीया वाले दिन ठाकुरजी चूंकि चंदन लेपन करके गर्भगृह के अंदर भक्तों को दर्शन देते हैं, इसलिए इस दिन फूलबंगला नहीं बनाया जाएगा। इसवर्ष पड़ रहे अधिकमास के कारण एक महीने फूलबंगला अधिक सजाए जाएंगे।

    ठाकुरजी को शीतलता देने को बनाते हैं फूलबंगला

    'ठाकुर बांकेबिहारी के प्राकट्यकर्ता स्वामी हरिदास जी अपने लढै़ते ठाकुरजी की भावरूप में सेवा करते थे। मौसम के अनुसार ही उनकी एक बालक के रूप स्वामी सेवा करते थे। गर्मी के मौसम में स्वामीजी के मन में भाव होता था कि ठाकुरजी को शीतलता दी जाए, तो वे वृक्षों की पत्तियों, केले के पत्ते और फूलों का डोला बनाकर उन्हें राहत देने की कोशिश करते थे। यही परंपरा बाद में चल कर फूलबंगला में परिवर्तित हो गई। स्वामी हरिदास द्वारा डाली गई इस परंपरा का आज भी उनके वंशज गोस्वामी फूलबंगला सेवा के रूप में निभा रहे हैं। -श्रीनाथ गोस्वामी, सेवायत: ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर।'