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बरसाना में राधारानी के दर्शन अब होंगे आसान, वेष्णो देवी की तरह लाडलीजी मंदिर में चालू होगा टोकन सिस्टम

By Vineet Kumar Mishra Edited By: Prateek Gupta
Published: Thu, 29 Jan 2026 09:25 PM (GMT+05:30)

बरसाना के राधारानी मंदिर में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए अब टोकन सिस्टम से दर्शन कराए जाएंगे। यह ...और पढ़ें

बरसाना में राधारानी के दर्शन को उमड़ी भीड़।

बरसाना में राधारानी के दर्शन को उमड़ी भीड़।

संवाद सूत्र, जागरण, बरसाना (मथुरा)। बरसाना के राधारानी मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और दर्शन में होने वाली अव्यवस्था को देखते हुए अब मंदिर प्रबंधन ने टोकन सिस्टम से दर्शन कराने का निर्णय लिया गया है। मंदिर परिसर में स्थित बड़ी सिंहपौर में काउंटर लगाकर श्रद्धालुओं को निश्शुल्क टोकन दिया जाएगा।

इसी टोकन नंबर के आधार पर वह दर्शन कर सकेंगे। यह व्यवस्था सीढ़ी और रोपवे से दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही परिक्रमा लगाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी होगी। होली के बाद टोकन सिस्टम व्यवस्था लागू होगी।

ब्रह्मांचल पर्वत स्थित राधारानी मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन करने आते है। मंदिर में स्थित बड़ी सिंहपौर से श्रद्धालुओं को रेलिंग के माध्यम से प्रवेश कराया जाता है। मंदिर समिति के रिसीवर आशीष कृष्ण शर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर बड़ी सिंहपौर पर पुलिस चौकी का निर्माण हो रहा है।

यहां पर एक काउंटर बनेगा, जहां पर टोकन सिस्टम लागू होगा। सभी श्रद्धालुओं को यहां से टोकन दिया जाएगा। उन्हें निश्शुल्क प्रसाद भी मंदिर की ओर से मिलेगा। टोकन से दर्शन कराने के पीछे उद्देश्य दर्शन में आपाधापी को रोकना और श्रद्धालुओं की संख्या का आकलन करना है। कुछ दिन पहले आधा घंटे का ट्रायल हुआ।

होली के बाद अंतिम ट्रायल सफल होने के बाद इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जूताघर भी मंदिर परिसर में बनाया जा रहा है। 25 फरवरी को लठामार होली है। इससे पहले पूरे मंदिर परिसर में बिजली की फिटिंग की जा रही है, ताकि शार्ट सर्किट का कोई खतरा न रहे।

मंदिर के पीछे के रास्ते का चौड़ीकरण करने के साथ निकास द्वार के एल आकृति के रास्ते को सीधा करने का प्रस्ताव भी मंदिर समिति ने प्रशासन को सौंपा है। इससे श्रद्धालुओं को आगमन में राहत होगी और भीड़ नहीं जुटेगी।

पुराने मंदिर में बनेगी छप्पन भोग की रसोई

जहां आज राधारानी मंदिर है, उसी मंदिर परिसर में एक पुराना मंदिर भी है। इसे जीर्णशीर्ण हो गया है। इसकी मरम्मत कराई जा रही है। इस पुराने मंदिर का उपयोग छप्पन भोग बनाने में होगा। यहीं श्रद्धालुओं के लिए भंडारा भी होगा। पुराने मंदिर से नए मंदिर तक लोहे का पुल बनाया जाएगा, जिसके माध्यम से भाेग प्रसादी के आवागमन की व्यवस्था होगी।

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