गोर्वधन मुड़िया मेला: लाखों की भीड़, फिर भी आस्था की राह पर नहीं डिग रहे कदम; अनूठा है दृश्य
गोवर्धन मुड़िया मेला में लाखों की भीड़ और भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग है। बुजुर्ग भी पूरी श्रद्धा के साथ परिक्रमा कर रहे हैं, जो यु ...और पढ़ें

मंगलवार को गोवर्धन में मुड़िया मेला के दौरान उमड़ा जनसैलाब।
जागरण संवाददाता, मथुरा। हर दिन लाखों की भीड़ है। गर्मी और उमस है। भीड़ में चलते वक्त पीछे से लग रहे धक्के हैं। लेकिन फिर भी आस्था कम नहीं है। बच्चा हो या बुजुर्ग, आस्था में डूबा है। थके पांव आगे बढ़ रहा है और गिरिराज जी के जयघोष हैं। गिरिराज नगरी में हर उम्र वय के लोग परिक्रमारत हैं। इनमें बुजुर्गवारों की संख्या भी कम नहीं हैं। कुछ को तो अपनी उम्र तक याद नहीं हैं।
एक अम्मा से पूछा तो उन्होंने बताया कि लाला यही होगी कोई 50 से 70 के बीच में। हालांकि देखने से अम्मा 70 की ही लग रहीं थीं। आगे अम्मा बोलीं कि लाला बचपन से ही परिकम्मा लगा रही हूं, पता नहीं गिरिराज जी के कितने फेरे लग गए हैं, जब तक गिरिराज जी बुला रहे हैं, तब तक आएंगे।
ऐसे कई बुजुर्ग गिरिराज जी की भक्ति से ओतप्रोत परिक्रमा लगा रहे हैं। इनकी उम्र इनकी भक्ति और समर्पण के आगे मानो हार माने बैठी है। इनके कदम न थक रहे हैं, न डिग रहे हैं बस आगे बढ़ रहे हैं। दानघाटी से बड़ी परिक्रमा प्रारंभ होते ही तलहटी गिर्राज जी के जयकारों से गूंज उठती है। परिक्रमार्थी उत्साह के साथ आगे बढ़ते जा रहे हैं।
इन्हीं परिक्रमार्थियों में राजस्थान से आए 65 वर्षीय सरवन भी शामिल हैं। परिक्रमा में चलते समय वह युवाओं को भी मात कर रहे हैं। कभी रुक कर गिरिराज जी की तरफ निहारने लगते हैं तो कभी उनका जयकारा लगा फिर चल पड़ते हैं। कुछ बुजुर्ग अपनी तीसरी पीढ़ी के साथ आए हैं। परिक्रमा लगाते लगाते उनमें भक्ति के बीज अंकुरित कर रहे हैं।
गिरिराज जी की परिक्रमा करने आते रहते हैं। उनके चरणों में अनूठा आनंद है। यहां आकर मन को बड़ी शांति मिलती है। मैं कई वर्षों से आ रहा हूं।
-विजय सिंह त्यागी, धौलपुर
छह परिक्रमा ब्रज चौरासी कोस की लगाई हैं और गिरिराज जी की 16 वीं परिक्रमा है। यहां अलग ही आनंद है। जाने का मन नहीं करता। -फूलवती, अलवर
परिक्रमा में थकान नहीं होती, आनंद आता है। मुड़िया मेला की परिक्रमा में दूर-दूर से भक्त आ रहे हैं। गिरिराज जी की शोभा भी निराली है। -भगवान, अलवर
60 साल से परिक्रमा दे रहा हूं। अब उम्र 88 वर्ष की हो गई है। हर माह दो परिक्रमा देता हूं। पहले कुछ दिन प्रतिदिन परिक्रमा दी थी। जब तक गिरिराज जी बुला रहे हैं, तो आ रहे हैं।
-छीतरमल, राधाकुंड