सुलभ इंटरनेशनल की पहल: वृंदावन की विधवा माताओं ने मनाई खुशियों भरी होली, टूटी सामाजिक रूढ़ियां
वृंदावन में सुलभ इंटरनेशनल ने विधवा माताओं के लिए होली का आयोजन किया। 92 वर्षीय रानीबाला पाल सहित सैकड़ों माताओं ने गुलाल और फूलों से होली खेली, जिससे ...और पढ़ें

होली के दौरान माताएं।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, वृंदावन। उम्र अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है, लेकिन 92 वर्ष की रानीबाला पाल के चेहरे पर खुशी ऐसी पसरी है कि जिस देख उम्र भी हार मान जाए। हम उम्र महिलाओं को लाल रंग के गुलाल से ऐसे रंगा कि दुनिया का हर रंग उसके आगे फीका था। फिर ठहाके मार कर हसीं और बोलीं, बेरंग जिंदगी में यह एक रंग बचा है।
वृंदावन में देश के अलग-अलग राज्यों से विधवा माताएं वृद्धाश्रम में रहती हैं। न अपने आते हैं और न खबर लेते हैं। सुलभ इंटरनेशनल संस्था ने सोमवार को होली सजाई तो वृद्ध माताओं के चेहरे पर भी खुशी का जो रंग निखरा, उसने सारे गम दूर कर दिए।
13 साल की पहल ने बदली सदियों की सोच
होली के उल्लास का गवाह बना गोपीनाथ मंदिर। सफेद साड़ी और सामाजिक एकांत तक जिन माताओं की दुनिया सीमित थी, सोमवार को उनके लिए रंगों की जो वर्षा हुई। दोपहर 12 बजे होली शुरू हुई। भगवान गोपीनाथ के समक्ष करीब एक सैकड़ा विधवा माताओं ने गुलाल और फूलों से होली खेली, मंत्रोच्चार किया और भक्ति संगीत पर नृत्य करते हुए उत्सव का आनंद लिया।
80 वर्षीय रीता पाल बंगाल की है। हर वर्ष होली का इंतजार रहता है।
सुलभ इंटरनेशनल के आयोजन में फिर टूटी सामाजिक रूढ़ियां
सफेद साड़ी पर जब गुलाल बिखरा तो खुशियां उनके हर ओर थीं। 92 वर्षीय रानीबाला पाल के चेहरे पर अपने हाथों से गुलाल मला, फिर कहा, बुरा न मानों होली है। 76 वर्षीय सोना मंडल की खुशी भी छिपाए नहीं छिपी। बच्चों ने तिरस्कृत किया तो वृंदावन में सहारा मिला। भगवत भजन में वक्त बीतता है। आज होली ने अपनेपन का अहसास दिया। कहा, अब नहीं लगता कि कोई अपना नहीं है।
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88 वर्षीय हेमलता दास और 93 वर्ष की रजनी उनकी अच्छी दोस्त हैं। उन्हीं के साथ होली की मस्ती की। जब होली के रसिया बजे तो माताओं के पैर भी थिरकने लगे। कुछ ने नृत्य किया और कुछ ने अपनी साथियों का उत्साहवर्धन। उनकी इस होली का साक्षी बनने देश के कोने-कोने से लोग पहुंचे।
जमर्नी से आईं अदा ने विधवा माताओं के साथ होली खेली
जमर्नी से अदा आईं। विधवा माताओं के साथ होली खेली। कहा कि माताओं के चेहरे की खुशी बताती है कि वह जीवन के हर पल को जीना चाहती हैं। स्पेन की नताशा भी माताओं के साथ होली में शामिल हुईं। बोलीं, जब रंग उड़ते हैं और मुस्कानें लौटती हैं, तब परंपराएं भी नया अर्थ ग्रहण कर लेती हैं। वृंदावन की यह होली उसी बदलते समाज की जीवंत तस्वीर बनकर सामने आई।
वर्ष 2013 में हुई थी शुरुआत
वर्ष 2013 में सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक रहे डा. बिंदेश्वरी पाठक ने वृंदावन में रह रही विधवाओं को सामाजिक सम्मान दिलाने और उन्हें त्योहारों से जोड़ने की पहल शुरू की थी।तभी से वह होली का आयोजन करा रहे हैं। माताओं को इस होली का हर वर्ष इंतजार रहता है। अब बिदेश्वरी पाठक नहीं रहे, तोसुलभ इंटरनेशनल की कार्यकारी संयोजक नित्या पाठक के नेतृत्व में आयोजन हुआ।