कौन थे 'फरसा वाले बाबा'? जिनकी मथुरा हाईवे पर हुई मौत, राम मंदिर आंदोलन के बाद घर छोड़कर गोसेवा को समर्पित किया जीवन
फिरोजाबाद के मूल निवासी चंद्रशेखर ने 'गोरक्षक दल' का गठन किया और हजारों गोवंश को बचाया। उनके निधन पर बरसाना के व्यापारियों ने बाजार बंद कर श्रद्धांजलि दी।

चंद्रशेखर का फाइल फोटो।

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किशन चौहान, बरसाना। अंधेरी रातों में जान हथेली पर रखकर गोतस्करों से भिड़ने वाले फरसा वाले बाबा भले ही अब ब्रजवासियों के बीच नहीं रहे, लेकिन उनके बुलंद इरादे व ओजस्वी भाषण आज भी लोगों के कानों में गूंज रहे हैं। 1992 में राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया।
पैर में गोली लग गई। फिर आजनौख आ गए और यहीं के होकर रह गए। कई बार परिवार के लोग ले जाने के लिए आए लेकिन मना कर दिया।
1992 में आंदोलन में लगी थी पैर में गोली, फिर आ गए आजनौख
फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज के गांव नगला भूपाल के रहने वाले चंद्रशेखर दो भाई थे। चंद्रशेखर सबसे छोटे थे। बचपन से ही चंद्रशेखर को राष्ट्र भक्ति व गोभक्ति का शौक था। इसलिए बचपन में अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने के बाद चंद्रशेखर ने अपना घर छोड़ दिया।

चंद्रशेखर का फाइल फोटो।
स्वजन कई बार घर ले जाने के लिए आए, लेकिन मना कर दिया
वर्ष 1992 में चंद्रशेखर बरसाना के समीपवर्ती आजनौख गांव आ गए। उस समय चंद्रशेखर की आयु करीब 18 वर्ष की थी। इस दौरान गांव के समीप रोड पर ही एक टीला था, जहां महादेव का छोटा सा मंदिर बना हुआ था।
वहीं चंद्रशेखर ने अपना आशियाना बनाया। धीरे-धीरे ग्रामीणों के सहयोग से एक छोटी सी गोशाला भी खोल ली। इसके बाद हाथों में फरसा लेकर चंद्रशेखर रात भर बीमार व असहाय गायों की देखभाल करते थे।
गोरक्षक दल का किया था गठन
इस दौरान गोतस्करों से भी उनकी भिड़ंत हुई। इसके बाद चंद्रशेखर बाबा ने गोरक्षक दल का गठन किया। धीरे-धीरे गोरक्षक दल से सैकड़ों युवा उनसे जुड़ते गए। गांव-गांव उनकी टीम का गठन हुआ। इस दौरान बाबा रात के अंधेरे में अकेले ही फरसा लेकर एक गोसेवक को बाइक से साथ लेकर घूमते थे।
कई बार बाबा व गोतस्करों का आमना-सामना हुआ। इस दौरान बाबा ने हजारों गोवंश को गोतस्करों से मुक्त कराया। कई बार बाबा पर गोतस्करों ने जानलेवा हमला भी किया, लेकिन वो बाल-बाल बचे।
बरसाना में व्यापारियों ने बाजार बंद कर दी श्रद्धांजलि
फरसा वाले बाबा चंद्रशेखर की मृत्यु पर एक तरफ संत समाज दुखी है। वहीं स्थानीय लोग भी उनके अचानक चले जाने पर दुखी हैं। इस दौरान जब उनकी मृत्यु का समाचार मिला तो बरसाना के व्यापारियों ने बाजार बंद कर बाबा को श्रद्धांजलि दी। सुदामा कुटी के महंत रामरज दास महाराज ने कहा कि चंद्रशेखर सच्चा राम सेवक था। जिसने गोवंशी की रक्षा के लिए बचपन में ही अपना घर छोड़ दिया।
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