42 मृतकों के खाते में जा रही दिव्यांग पेंशन, आठ अपात्र भी पीछे नहीं; मथुरा में जांच मे आया फर्जीवाड़ा सामने
मथुरा में दिव्यांग पेंशन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां 42 मृत और 8 अपात्र लोगों के खातों में पेंशन जा रही थी। डीबीटी प्रणाली के कारण धन ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, मथुरा। दिव्यांग पेंशन में 42 मृतकों के खाते में दिव्यांग पेंशन पहुंचने का मामला प्रकाश में आ गया। पर भला हो डीबीटी प्रणाली का, कि दिव्यांग लाभार्थी के खाते से रुपये ही नहीं निकल पाए। अब इन सभी के खाते से धनराशि वापस कराई जा रही है। दूसरी ओर आठ अपात्र ऐसे पाए गए, जो जिले से दिव्यांग पेंशन के हकदार भी नहीं थे, लेकिन फिर भी पेंशन ले रहे थे।
हर वित्तीय वर्ष के शुभारंभ पर सरकारी योजनाओं के सत्यापन के साथ ही नए लाभार्थियों का चयन किया जाता है। जिले में दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग के द्वारा 14,902 दिव्यांगों को पेंशन दी जा रही है। इनमें से सत्यापन में 50 अपात्र पाए गये हैं। इनमें 42 ऐसे लाभार्थी हैं, लेकिन उनके खातें में पेंशन अभी भी जा रही है। हालांकि पेंशन की धनराशि को ऐसे मृतक दिव्यांग के किसी स्वजन निकाल नहीं पाए।
पेंशन खाते में जाने के बाद भी उसका गबन इसलिए नहीं हुआ क्योंकि डीबीटी के माध्यम से भुगतान होने के कारण इसमें गबन नहीं हुआ। दूसरी ओर आठ प्रकरण ऐसे भी मिले, जो विवाह के बाद अन्य राज्यों में शिफ्ट हो गए। ये सभी आठ लाभार्थी महिला हैं। हालांकि उसके बाद भी इन महिला लाभार्थियों ने जिले की पात्रता सूची से अपना नाम हटाने के साथ ही अपनी नई जगह पर पंजीकरण नहीं कराया था।
सत्यापन में इनका भी फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। ऐसे मृतकों और अपात्रों के खातों को अब फ्रीज किया जाएगा । दिव्यांग पेंशन के रुपए ये ऐसे लोगों के खाते में से वापस रिकवर किए जाएंगे।
संयुक्त निदेशक ने की समीक्षा
संयुक्त निदेशक, दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग रणजीत सिंह ने विभागीय योजनाओं की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा की। उन्होंने लाभार्थियों के लगातार सत्यापन के साथ ही पात्रों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए कहा। जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी, विशाल कुमार ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष सांसद निधि से 15 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल वितरित होंगी।
इनमें आधी धनराशि विभाग से और आधी सांसद निधि से ली जाएगी। शादी विवाह योजना में 14 का लक्ष्य है। इस योजना में अनुदान 20 से 35 हजार रुपये तक मिलता है। दूसरी ओर दुकान निर्माण और संचालन के लिए 13 का लक्ष्य मिला है।