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    मथुरा के 101 गांवों में तैयार होंगे लाडली वन, बेटियों के नाम पर लगाए जाएंगे पौधे

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 08:07 PM (IST)

    मथुरा में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए 101 गांवों में 'लाडली वन' परियोजना शुरू की जा रही है। ...और पढ़ें

    यह तस्वीर AI जेनेरेटेड है

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    HighLights

    1. मथुरा के 101 गांवों में लाडली वन परियोजना शुरू।

    2. स्कूल की बेटियों के नाम पर लगेंगे पौधे, वे करेंगी देखभाल।

    3. 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' को पर्यावरण से जोड़ा गया।

    जागरण संवाददाता, मथुरा। कान्हा की नगरी में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश अब यहां के वन भी देंगे। जिले के 101 गांवों में लाडली वन तैयार किए जाएंगे। जिस गांव में वन लगाया जाएगा, वहां स्कूल में पढ़ने वाली बेटियों के नाम से एक-एक पौधा लगेगा। पौधे पर उनके नाम की प्लेट भी लगेगी। पढ़ाई पूरी कर चुकी अन्य बेटियां भी चाहेंगी तो उनके नाम से भी पौधे लगेंगे। इन फल और फूलदार पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी बेटियों को दी जाएगी।

    बालिका शिक्षा व संरक्षण को पर्यावरण से जोड़ने का पहली बार एक अनूठा प्रयोग मथुरा में किया जा रहा है। इसी के तहत लाडली वन की परियोजना तैयार की गई है। कुल 101 गांवों में लाड़ली वन तैयार किए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन वनों में कम से कम 50-50 पौधों के नाम संबंधित गांव की स्कूल जाने वाली बेटियों के नाम पर रखे जाएंगे।

    हालांकि यदि स्वजन चाहें तो बहुत छोटी बच्चियों या पढ़ाई पूरी कर चुकी बेटियों के नाम की भी प्लेट इन पौधों पर लगाई जाएगी। परियोजना के पीछे सोच भी यही है कि अपने नाम से इन पौधों को पहचान मिलते देख बेटियां और उनके स्वजन स्वत: ही इनकी देखरेख की जिम्मेदारी को गंभीरता से लेंगे।

    चिन्हित गांवों में मियावाकी पद्धति से पौधारोपण के लिए जो भूमि चिन्हित की गई है, उसे साफ-सफाई और झाड़ आदि साफ कर पौधारोपण के लिए तैयार किया जा रहा है। इन वनों में पौधों की वृद्धि-पोषण के लिए गोबर युक्त जैविक खाद का प्रयोग किया जाएगा। मंगलवार से रिफाइनरी क्षेत्र के गांव बरारी से यह परियोजना प्रारंभ होगी।

    यह परियोजना खुद सीडीओ डॉ. पूजा गुप्ता ने तैयार की है। बेटियों को पढ़ाने के प्रति समाज को जागरूक करने और पौधों की परवरिश करने की यह अनूठी पहल की गई है। जिन गांवों का चयन किया गया है, उनमें ज्यादातर यमुना के किनारे हैं या फिर पानी की आसान उपलब्धता है।

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    इन गांवों की निर्विवादित भूमि को लाडली वन तैयार करने के लिए प्रयोग किया जाएगा। डीपीआरओ धनंजय जायसवाल ने बताया कि लाडली वन का कार्य 15 वें वित्त से कराया जाएगा। हर वन की लागत करीब चार लाख रुपये होगी। इस पूरी परियोजना में करीब तीन लाख पौधे लगाए जाएंगे।

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    किस प्रकार के लगेंगे पौधे

    • 300 पौधे- नीम, जामुन, पीपल, बरगद, शीशम, अर्जुन, इमली, सागवान, देसी आम, पिलखन, कटहल, और जंगली जलेबी।
    • 600 पौधे- अमलतास, कदंब, पापड़ी, इंडियन कोरल ट्री, कचनार, कनक चंपा, पलाश और मौलसरी।
    • 1050 पौधे- आंवला, बेल, बेर, हरसिंगार, सहजग, अमरूद, सीता अशोक, आडू, संतरा, मौसमी, नींबू और अचार।
    • 1050 करी पत्ता, मेहंदी, हिबिस्कस, कमीनी, बोगनविलिया और कनेर।


    लाडली वन परियोजना इसलिए तैयार की गई है, ताकि पर्यावरण संरक्षण को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से जोड़ा जा सके। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि बेटियों का नाम शामिल होने के कारण लाडली वन के संरक्षण के लिए स्थानीय जनसहभागिता स्वत: हो जाएगी।

                                                                                             डॉ. पूजा गुप्ता, सीडीओ