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    रालोद छोड़कर 'साइकिल की सवारी' पर अशोक अग्रवाल, जयन्त को झटका; विधानसभा चुनाव से पहले मथुरा में सियासी हलचल तेज

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 03:27 PM (IST)

    बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक अग्रवाल ने नौ साल बाद रालोद छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। भाजपा-रालोद गठबंधन के कारण मथुरा सीट पर टिकट की उम्म ...और पढ़ें

    लखनऊ में सपा की सदस्यता लेने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से हाथ मिलाते डा. अशोक अग्रवाल। फोटो स्वयं द्वारा

    लखनऊ में सपा की सदस्यता लेने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से हाथ मिलाते डा. अशोक अग्रवाल। फोटो स्वयं द्वारा

    HighLights

    1. डॉ. अशोक अग्रवाल ने नौ साल बाद रालोद छोड़ी।

    2. सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी में शामिल।

    3. मथुरा सीट से सपा टिकट के प्रबल दावेदार बने।

    जागरण संवाददाता, मथुरा। रालोद के हैंडपंप से राजनीति की खेती सींचने की उम्मीद लगाए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक अग्रवाल ने अब साइकिल की सवारी कर ली है। नौ वर्षों तक रालोद से दोस्ती रखने के बाद उन्होंने सपा में वापसी की। सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में लखनऊ में पार्टी की सदस्यता ले ली।

    अशोक अग्रवाल ने यूं ही राजनीतिक दल नहीं बदला। दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके अशोक इस बार भी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन भाजपा और रालोद के बीच राजनीतिक गठबंधन होने से मथुरा की सीट रालोद के खाते में आने वाली नहीं है। ऐसे में रालोद से नाता तोड़ अब सपा में शामिल हो गए। अब सपा से वह टिकट के प्रबल दावेदार भी माने जा रहे हैं।

    नौ वर्ष बाद रालोद से दोस्ती तोड़ साइकिल की सवारी की

    डॉ. अशोक अग्रवाल की समाजवादी पार्टी में मजबूत पकड़ रही है। वर्ष 2012 में उन्होंने सपा से मथुरा विधानसभा का चुनाव लड़ा और 53099 वोट पाकर कड़ी टक्कर दी। 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर सपा से दोस्ती टूटी और रालोद का दामन थाम लिया। यह चुनाव फिर रालोद के सिंबल पर लड़ा और करीब 30 हजार मत पाए। इस बार भी वह रालोद से ही टिकट चाह रहे थे।

    दो बार विधानसभा चुनाव लड़े, अब फिर से मैदान में उतरने की तैयारी

    भाजपा और रालोद इस बार गठबंधन से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में मथुरा जैसी महत्वपूर्ण सीट भाजपा रालोद को नहीं देगी। यह राजनीति के जानकार अच्छी तरह जानते हैं। ऐसे में डॉ. अशोक अग्रवाल ने पाला बदल लिया और अपने पुराने घर में वापसी कर ली। भले ही उन्होंने अपनी टिकट की दावेदारी को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सपा की सदस्यता लेने के बाद उन्हें राजनीतिक गलियारों में टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

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    इधर, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने करीब चार माह पहले बलदेव सीट को छोड़कर मथुरा, मांट, गोवर्धन और छाता में पार्टी के दावेदारों को तैयारी करने के निर्देश दिए थे। मथुरा विधानसभा से अनिल अग्रवाल खुद को पार्टी का प्रत्याशी मानकर तैयारी कर रहे हैं।

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    ऐसे में डॉ. अशोक अग्रवाल की सपा में वापसी से अनिल अग्रवाल की भी बेचैनी बढ़ गई है। ऐसा इसलिए भी है कि सपा का जनाधार जिले में राजनीतिक रूप से कमजोर है, लेकिन जब 2012 में डॉ. अशोक चुनाव लड़े तो 53 हजार मत हासिल किए।

    डॉ. अशोक कहते हैं कि समाज के प्रत्येक वर्ग में उनकी पकड़ है, यही कारण है कि विधानसभा चुनाव में उन्हें इतने अधिक मत हासिल हुए थे।