श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद विवाद, हिंदू पक्ष ने कहा... ईदगाह हटाओ, हम देंगे 100 किमी दूर जमीन
श्रीकृष्ण जन्मस्थान-शाही मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई समझौता वार्ता में हिंदू पक्ष ने ईदगाह हटाने पर 100 किमी दूर नई ईदगाह के लिए भ ...और पढ़ें

श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह।
जागरण संवाददाता, मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के बीच न्यायालय में चल रहे विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोनों पक्षों में शुक्रवार को फिर समझौता वार्ता हुई। श्रीकृष्ण जन्मस्थान की ओर से पक्षकारों के अलावा ईदगाह कमेटी के सचिव भी शामिल हुए। हिंदू पक्ष ने साफ कहा कि ईदगाह हटा लें, 100 किमी दूर नई ईदगाह बनाने के लिए हम भूमि दे देंगे।
इस पर ईदगाह कमेटी ने साफ कहा कि हमारा तो समझौता 1968 में हो गया है, फिर किसी बात का समझौता। करीब डेढ़ घंटे तक चली वार्ता के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला। अब 18 अगस्त को फिर दोनों पक्षों के बीच विकल्पों को लेकर वार्ता होगी।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के बीच विवाद हाई कोर्ट में चल रहा है। कुछ लोगों ने जून में सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर मांग की कि दोनों पक्षों के बीच विवाद को समझौता वार्ता के माध्यम से सुलझाया जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अदालत को विशेष लोक अदालत आयोजित कर दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का निर्देश दिया।
पिछली चार जुलाई को विशेष लोक अदालत में दोनों पक्षों को बुलाया गया। तब जन्मस्थान पक्ष के लोगों ने कहा कि वह ईदगाह कमेटी यहां से ईदगाह हटा ले हम नई ईदगाह बनाने के लिए सौ किमी दूर भूमि देंगे। इस वार्ता में ईदगाह कमेटी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ, उनका तर्क था कि हमारा वाद न्यायालय में चल रहा है। समझौता वार्ता की जरूरत नहीं है।
शुक्रवार को एक बार फिर अपर जिला जज चतुर्थ अरविंद कुमार की ओर से विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। फिर दोनों पक्षों को बुलाया गया। दोपहर तीन बजे से शुरू हुई वार्ता करीब डेढ़ घंटे तक चली। जन्मस्थान पक्ष की ओर से ज्यादातर वादकारी वार्ता में पहुंचे। उन्होंने फिर अपनी बात दोहराते हुए कहा कि ईदगाह कमेटी ईदगाह हटा ले, हम 100 किमी दूर नई ईदगाह बनाने को भूमि देंगे।
खबरें और भी
उधर, शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने कहा कि कमेटी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के बीच वर्ष 1968 में ही समझौता हो गया, इसकी कोर्ट से डिक्री भी हो गई। अब तो समझौते का कोई मतलब ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष न्यायालय में दायर किए गए वाद वापस ले लें। उन्होंने कहा कि सौ किमी दूर भूमि उपलब्ध कराने की बात ही गलत है। इस पह हिंदू पक्ष ने कहा कि आसपास कोई भूमि चिन्हित करें, हम वहां भूमि दे देंगे।
करीब डेढ़ घंटे चली वार्ता के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला। अदालत ने कहा कि ईदगाह को हटाने और मुकदमा वापस लेने की बातों को छोड़कर किसी अन्य विकल्प पर विचार किया जाए। अब फिर एक बार 18 अगस्त को समझौता वार्ता के लिए घोषित की गई।
इस मामले में समझौता के लिए 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में भी वार्ता होगी। वार्ता के दौरान अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह, मुकेश खंडेलवाल, अजय प्रताप सिंह, विजय बहादुर सिंह, दिनेश फलाहारी आदि मौजूद रहे।
यह है मामला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान के स्वामित्व में 13.37 एकड़ भूमि है। इस भूमि के हिस्से में ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान से सटी करीब पौने दो एकड़ भूमि पर शाही मस्जिद ईदगाह बनी है। 1832 से दोनों पक्षों के बीच विवाद चला आ रहा है। वर्ष 1968 में शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान की व्यवस्था देखने के लिए गठित श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के बीच समझौता हुआ।
वर्ष 1920 में फिर इसे लेकर वाद दायर हुआ और कहा गया कि जन्मस्थान की पूरी भूमि ट्रस्ट के नाम है, सेवा संघ को समझौता करने का अधिकार नहीं है। इस समझौते को रद किया जाए। तब से अब तक 18 मुकदमे न्यायालय में दायर हो चुके हैं।