वृंदावन में फिर हादसे का इंतजार, बिना लाइफ जैकेट नौका विहार; मोटर बोट ले बैठी थी 17 श्रद्धालुओं की जान
वृंदावन में चार माह पहले हुए नौका हादसे के बाद बनी एसओपी का पालन नहीं हो रहा है, जिससे नाविक बिना लाइफ जैकेट श्रद्धालुओं को नौका विहार करा रहे हैं। अध ...और पढ़ें

यमुना में बिना लाइफ जैकेट्स के नौकायन कराता नाविक।
जागरण संवाददाता, मथुरा। वृंदावन में चार माह पहले यमुना नदी में मोटरबोट पलटने से पंजाब के 17 श्रद्धालुओं की मृत्यु हुई। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा नौका विहार के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई। इसे प्रभावी कराया गया। लेकिन, समय गुजरने के साथ अधिकारियों ने इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया। नतीजा नाविकों की मनमानी शुरू हो गई।
आज भी कई नाविक बिना लाइफ जैकेट श्रद्धालुओं को नौका विहार करा रहे हैं। लेकिन, जिम्मेदार अधिकारी इस ओर बेपरवाह बने हुए हैं। शायद उन्हें, फिर हादसे का इंतजार है। शहरी क्षेत्र से यमुना नदी गुजर रही है। मंदिरों के दर्शन करने आने वाले अधिकांश श्रद्धालु मथुरा, वृंदावन, महावन, गोकुल में घाटों पर पहुंचकर यमुना में नौका विहार करते हैं।
नौका विहार कराने के लिए नाविकों द्वारा मोटरबोट एवं नाव का संचालन किया जाता है। 10 अप्रैल को वृंदावन के केशीघाट पर यमुना में नौका विहार करते समय पीपा से टकराकर मोटरबोट पलट गई, जिससे उसमें सवार पंजाब के 16 श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई थी। इस मामले में ठेकेदार एवं नाविक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया था। हादसा के बाद प्रशासन जागा और एसओपी तैयार की गई।
नाविकों के लिए नियमावली बनाई गई। नगर निगम में पंजीकरण की व्यवस्था शुरू की गई। सभी नाविकों को निर्देश दिए गए कि वे बिना लाइफ जैकेट के श्रद्धालुओं को नौका विहार नहीं कराएंगे। साथ ही क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को भी नहीं बैठाया जाएगा। प्रारंभिक दौर में तो पुलिस, प्रशासन एवं नगर निगम अधिकारियों ने इस व्यवस्था की निगरानी की।
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कुछ नाविकों ने नियमों का उल्लंघन किया तो कार्रवाई की गई। लेकिन, एक माह से अधिकारियों ने इस ओर निगरानी बंद कर दी। नतीजा कुछ नाविक मनमानी करने लगे हैं। प्रशासन द्वारा बनाई गई एसओपी का पालन नहीं कर रहे। मथुरा जोन में नाविकों द्वारा नौका विहार कराया जा रहा है। 100 रुपये प्रति श्रद्धालु लिए जा रहे हैं। लेकिन, कुछ नाविक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
नौका विहार करने आने वाले श्रद्धालुओं को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई जा रही हैं। लेकिन, पुलिस, प्रशासनिक एवं नगर निगम के अधिकारी इस ओर बेपरवाह बने हुए हैं। अगर ढिलाई इसी तरह रही तो फिर हादसे की पुनरावृत्ति हो सकती है।
समय-समय पर नाव, मोटरबोट संचालन व्यवस्था का संचालन देखा जाता है। अगर कोई नाविक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो कार्रवाई की जाती है। अगर बिना लाइफ जैकेट के नौका विहार कराया जा रहा है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
-नरेंद्र सिंह यादव, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी।