अब खेतों की सिंचाई में बाधक नहीं बनेगी बिजली,16 फीडरों से होगी नलकूपों को आपूर्ति
मऊ में किसानों को सिंचाई के लिए बेहतर बिजली आपूर्ति मिलेगी। 16 नए फीडर बनाए जा रहे हैं जो केवल नलकूप कनेक्शनों को बिजली देंगे। इससे घरेलू आपूर्ति प्रभ ...और पढ़ें

अब खेतों की सिंचाई में बाधक नहीं बनेगी बिजली।

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, मऊ। खेतों की सिंचाई के लिए बेहतर बिजली देने की कवायद शुरू कर दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में 16 फीडरों का निर्माण किया जा रहा है। इसके बाद नलकूप कनेक्शन को अलग से बिजली आपूर्ति की जाएगी। इन फीडरों से घरेलू कनेक्शन को विद्युत आपूर्ति नहीं होगी। इससे सिंचाई को लेकर होने वाली समस्या दूर हो जाएगी।
जिले में 3.06 लाख किसानों द्वारा 1.71 लाख हेक्टेयर में रवि व खरीफ फसल की खेती किया जाता है। इन खेतों की सिंचाई के लिए विद्युत विभाग की तरफ से लगभग 26 हजार नलकूप का कनेक्शन किसानों को दिया गया है।एक ही फीडर से घरेलू व नलकूप कनेक्शन होने की वजह से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए बेहतर बिजली नहीं मिल पाती है।
साथ ही ट्रिपिंग, फाल्ट, कम वोल्टेज सहित अन्य समस्याओं से किसानों को जुझना पड़ता है। इससे खेती किसानी पूरी तरह से प्रभावित होती है। फसलों की सिंचाई बिजली के अभाव में समय से नहीं हो पाती है। इसकी वजह से किसानों को पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ता है। जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता है।
इसके समाधान के लिए जिले में 16 फीडरों का निर्माण किया जा रहा है। इन फीडरों के माध्यम से नलकूपों को अलग से विद्युत आपूर्ति की जाएगी। इससे घरेलू कनेक्शन को विद्युत आपूर्ति नहीं होने की वजह से किसानों को बेहतर बिजली मिलेगी। साथ ही किसानों को ठंडी, गर्मी व बरसात के मौसम में रात में जागकर खेती की सिंचाई करने से छुटकारा मिल जाएगा।
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वहीं, विद्युत विभाग की तरफ से नलकूप का कनेक्शन लेने वाले किसानों को सहूलियत दिया जा रहा है। किसानों को 10 हार्स पावर तक का कनेक्शन न्यूनतम दर पर दिया जा रहा है। साथ ही 144 यूनिट प्रति किलो वाट बिजली भी मुफ्त दी जा रहा है। ताकि किसान सस्ते दर पर समय से खेतों की सिंचाई कर अपनी आमदनी दोगुनी कर सके।
किसानों को बेहतर बिजली की आपूर्ति करने के लिए अतिरिक्त फीडरों का निर्माण किया जा रहा है। इससे घरेलू कनेक्शन को आपूर्ति नहीं की जाएगी। इससे किसानों को काफी सहूलियत मिलेगी। -इं माग्रेंद्र कुमार, अधीक्षण अभियंता, विद्युत विभाग।