मऊ में 90 शिक्षकों से दो करोड़ की धोखाधड़ी, पुलिस ने दो आरोपियों को बरेली से किया गिरफ्तार
मऊ में 90 शिक्षकों से दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में घोसी कोतवाली पुलिस ने बरेली से नरेंद्र पाल और सौरभ पाल को गिरफ्तार किया है। ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मऊ। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव का पीआरओ व बीएसए अधिकारी बनकर ट्रांसफर, पोस्टिंग व जांच समाप्त कराने के नाम पर 90 शिक्षकों से दो करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले बरेली जनपद के फतेहगंज पश्चिमी थाना के रहपुरा जागीर निवासी नरेंद्र पाल व सीवीगंज टेवुलिया निवासी सौरभ पाल को घोसी कोतवाली पुलिस ने बरेली से गिरफ्तार किया है।
इसमें फरार दिल्ली के आर्य नगर निवासी विक्रम मिश्र की तलाश पुलिस कर रही है। इसकी जानकारी सोमवार को पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने कार्यालय में मीडिया से वार्ता के दौरान दी।
यह है पूरा मामला
आरोपितों ने 16 फरवरी 2026 को दोहरीघाट थाना के मोहम्मदाबाद सिपाह निवासी व कंपोजिट विद्यालय रिसाव में तैनात महिला शिक्षक चिंता देवी को फोन किया गया। आरोपितों ने महिला शिक्षक को बताया की आप के स्थान पर कैंसर पीड़ित शिक्षक की तैनाती के लिए आप को लखनऊ स्थानांतरित किया जा रहा है। इसको रोकवाने के लिए 50 हजार रुपये लगेगा।
इस झांसे में आकर महिला शिक्षक ने ठग द्वारा भेजे गए स्कैनर पर 50 हजार रुपये भेज दिया। इसकी पड़ताल करने पर महिला शिक्षक को ठगी की जानकारी हुई।
इसकी शिकायत महिला शिक्षक की पुत्री घोसी कोतवाली के रघौली गांव निवासी रोली ने 21 मार्च 2026 को घोसी कोतवाली में दर्ज कराई। जांच के दौरान तीन आरोपितों का नाम प्रकाश में आया। इसमें दो को गिरफ्तार किया गया है।
एसपी ने बताया कि आरोपित इंटरनेट मीडिया के माध्यम से शिक्षक की जानकारी प्राप्त करते थे। इसके बाद संबंधित शिक्षक के तैनाती गांव के प्रधान का नंबर गूगल से निकालकर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव का पीआरओ व बीएसए बन फोन करते थे।
खबरें और भी
संबंधित शिक्षक के विरुद्ध जांच प्रचलित होने व स्थानांतरण की बात कहकर शिक्षक को नंबर देकर बात करने को कहते थे। शिक्षक के बात करने पर ठग डराते धमकाते और रुपये की मांग करते थे। इससे बचने के लिए शिक्षक द्वारा पैसा देने की बात कहते ही वाट्सएप के माध्यम से क्यूआर कोड भेज कर आनलाइन धनराशि मंगा लेते थे। इसके बाद सिम बंद कर देते थे।
एसपी ने बताया कि आरोपित ट्रांसफर रोकवाने के लिए 50 हजार रुपये और जांच खत्म कराने के लिए डरा धमकाकर एक से डेढ़ लाख रुपये तक लेते थे। बताया कि आरोपित के पास से नौ मोबाइल नंबर व एटीएम कार्ड बरामद किया गया है। इनके तीन बैंक खातों को फ्रिज किया गया है।
छह मुकदमे हैं पंजीकृत
सुनियोजित तरीके से गिरोह बनाकर ठगी करने वाले नरेंद्र पाल के विरूद्ध आईटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में बरेली में दो, हरियाणा के भिवानी में एक, मुजफ्फरनगर में एक बिजनौर में एक व स्थानीय कोतवाली में एक प्राथमिकी पंजीकृत है।